नई दिल्ली। उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए एजुकेशन लोन एक बड़ा सहारा बनता है। आर्थिक तंगी के कारण कई छात्र देश और विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में एजुकेशन लोन उनकी राह आसान करता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लोन लेते समय केवल कम ब्याज दर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी सभी शर्तों को समझना भी बेहद जरूरी है।
बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार एजुकेशन लोन लेने से पहले सरकारी और निजी बैंकों की ब्याज दरों की तुलना अवश्य करनी चाहिए। ब्याज दर में मामूली अंतर भी लंबे समय में चुकाई जाने वाली कुल राशि पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए छात्र और अभिभावक दोनों को सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।
सरकारी बैंकों में पीएनबी की दर सबसे कम
वर्तमान में सरकारी बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) सबसे कम 8.10 प्रतिशत शुरुआती ब्याज दर पर एजुकेशन लोन उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) 8.90 प्रतिशत, केनरा बैंक और यूनियन बैंक 9.25 प्रतिशत तथा बैंक ऑफ बड़ौदा 10.25 प्रतिशत की दर से लोन दे रहे हैं।
निजी बैंकों की ब्याज दरें भी करें चेक
निजी क्षेत्र के बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक 9 प्रतिशत की शुरुआती ब्याज दर पर एजुकेशन लोन उपलब्ध करा रहा है। वहीं आईडीएफसी बैंक 9.50 प्रतिशत, आईडीबीआई बैंक 9.90 प्रतिशत, एक्सिस बैंक 10.81 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 12.50 प्रतिशत तक की दर से लोन दे रहा है।
केवल ब्याज नहीं, इन शर्तों को भी समझें
विशेषज्ञों का कहना है कि एजुकेशन लोन लेते समय मोरेटोरियम पीरियड, प्रोसेसिंग फीस, क्रेडिट स्कोर, अतिरिक्त शुल्क और पुनर्भुगतान की शर्तों को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए। कई मामलों में बैंक बड़े लोन पर कोलेटरल या गारंटी की मांग करते हैं। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को यह समझ लेना चाहिए कि लोन के बदले कौन-कौन से दस्तावेज या संपत्ति सुरक्षा के रूप में रखनी पड़ सकती है।
नौकरी और आय की संभावना का भी करें आकलन
लोन लेने से पहले चुने गए कोर्स की रोजगार संभावनाओं और भविष्य की आय का भी आकलन करना चाहिए। इससे पढ़ाई पूरी होने के बाद ईएमआई चुकाने में परेशानी नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद लिया गया एजुकेशन लोन का निर्णय ही छात्रों के लिए सबसे अधिक लाभकारी साबित होता है।