बरेली। बुधवार को हुई तेज बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की मानसून तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। महज कुछ घंटों की बारिश में शहर के सुभाषनगर पुलिया, प्रमुख मार्ग, बाजार, निचले इलाके और पॉश कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। कई स्थानों पर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए और लोगों को घंटों जाम व जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।
बारिश के बाद सबसे अधिक परेशानी निचले इलाकों में देखने को मिली। कई घरों और दुकानों तक पानी पहुंच गया, जबकि प्रमुख सड़कों पर जलभराव के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित रहा। दोपहिया और चारपहिया वाहन पानी में फंसकर बंद हो गए, जिससे कई स्थानों पर लंबा जाम लग गया। लोगों को घरों से निकलने और रोजमर्रा के कामकाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। तेज बारिश के चलते सुभाषनगर पुलिया पर भी जलभराव हो गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जलभराव में बच्चों ने चलाई नाव, विरोध भी जताया
शहर के सिकलापुर क्षेत्र में जलभराव के बीच बच्चों ने थर्माकॉल की नाव बनाकर पानी से भरी सड़क पर चलाई। यह नजारा देखने के लिए आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। राहगीरों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो चर्चा का विषय बन गया। बच्चों ने हाथों में जागरूकता संदेश लिखे पोस्टर लेकर अनोखे अंदाज में जलभराव के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया। वार्ड 64 के पार्षद जयप्रकाश राजपूत ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय फर्नीचर मंडी के नाम से प्रसिद्ध सिकलापुर पूरी तरह जलमग्न हो गया। गलियां तालाब जैसी बन गईं और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया।
अतिक्रमण से दम तोड़ चुका ऐतिहासिक नाला
पार्षद का आरोप है कि लाला लाजपत राय मार्केट के सामने स्थित करीब 20 फीट चौड़े ऐतिहासिक नाले पर वर्षों से अवैध अतिक्रमण किया गया है। नाले को केवल 18 इंच की पाइप तक सीमित कर दिए जाने से उसकी जल निकासी क्षमता लगभग समाप्त हो गई है। दर्जनों अवैध निर्माणों के कारण बारिश का पानी समय पर नहीं निकल सका और पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया।
नालों की सफाई के दावों पर उठे सवाल
हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में अधिकांश नाले ओवरफ्लो हो गए। कई स्थानों पर नालियां कचरे से अटी मिलीं, जिससे पानी सड़कों पर भर गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सफाई अभियान केवल कागजों तक सीमित रहा और जमीनी स्तर पर पर्याप्त कार्य नहीं हुआ।
स्थायी समाधान की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर मानसून में शहर को इसी समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। लोगों ने प्रशासन से जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, अतिक्रमण हटाने, नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है।