बरेली। दस लाख रुपये की रंगदारी मांगने और मकान व नौकरी का लालच देकर धर्मांतरण कराने की कोशिश करने के आरोपी एमसीआई बरेली के प्रापर्टी चेयरमैन जगमोहन सिंह पर आरोप साबित हो रहे हैं। अपर सत्र न्यायाधीश अमृता शुक्ला की कोर्ट ने माना कि प्रकरण अत्यंत गंभीर है। ऐसे मामले में जमानत देना न्यायोचित नहीं है। शासकीय अधिवक्ता के विरोध और वादी पक्ष के सीनियर एडवोकेट उपदेश गुप्ता की प्रभावी पैरवी पर कोर्ट ने एमसीआई के प्रापर्टी चेयरमैन का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
मिशन कंपाउंड में शीशमहल के रहने वाले डार्विन ए. डेविड ने 23 जून को कोतवाली में संजीव कुमार उर्फ जाहिद, कथित प्रापर्टी चेयरमैन एमसीआई जगमोहन सिंह, कथित डिस्ट्रिक्ट सुपरिंटेंडेंट राजीव मैसी और उनके सहयोगियों के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने, रंगदारी वसूलने और परिवार समेत बम से उड़ाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दबंगों ने दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी। और चार लाख रुपये वसूल कर लिये थे। लगातार और रकम देने का दबाव बना रहे थे। रुपये नहीं देने पर फर्जी शिकायतों में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। मुकदमे की विवेचना स्टेशन रोड चौकी इंचार्ज वैभव गुप्ता कर रहे हैं।
कोतवाली पुलिस ने साक्ष्यों और गवाहों के जरिये साबित कर दिये आरोप
कोतवाली पुलिस ने 21 जुलाई को जगमोहन सिंह को रेलवे कॉलोनी के पास से गिरफ्तार किया था। आरोपी प्रिसिंपल से रिटायर होने के बाद भी बिशप मंडल इंटर कॉलेज परिसर में बने आवास में रह रहा था। कोतवाली पुलिस ने रंगदारी मांगने और धमकी देने के समर्थन में कोर्ट में चार लोगों की गवाही पेश की। इसके अलावा धमकी भरे पत्र व अन्य साक्ष्यों को पुलिस ने पूरी मजबूती के साथ अपने पक्ष कोर्ट में रखा। वादी डार्विन के अधिवक्ता ने 11 अगस्त को कोर्ट में जोरदार बहस की। जिस पर कोर्ट ने आरोपी की जमानत खारिज कर दी। आरोपी अब हाईकोर्ट से जमानत लेने की तैयारी करने में लग गया है।
फर्जी कागजात और शपत्र पत्र लगाने में भी फंसे
रंगदारी मांगने के आरोप में वर्तमान में जगमोहन सिंह जेल में हैं। उनके भतीजे अक्षय ने जमानत देने की कोर्ट से गुहार लगाई थी। कोर्ट परिसर के सूत्रों के मुताबिक अक्षय और उनके अधिवक्ता ने कुछ ऐसे कागजात कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किये, जो सत्यापित प्रतिलिपि नहीं थीं। वादी के अधिवक्ता ने कोर्ट में उन दस्तावेजों की वैधता पर सवाल खड़े किये। इसके बाद वादी के अधिवक्ता ने कोर्ट में धारा 340 के तहत केस दाखिल कर दिया। धारा 340 का अभिप्राय है कि किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना और गलत दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होता है। जमानत के साथ ही एडीजे कोर्ट ने धारा 340 पर भी सुनवाई की। इस मामले में फर्जी कागजात लगाने और गलत अभिप्राय से किसी को रोकने के आरोप में केस भी दर्ज हो सकता है।