बरेली। ट्रेन में सफर के दौरान हुई एक मुलाकात दिल्ली के दो दोस्तों को बरेली तक खींच लाई। दावा है कि बैंक खाते और सिम देने के बदले उन्हें लाखों रुपये कमाने का लालच दिया गया। इसके बाद दोनों के आधार कार्ड में दिल्ली का पता बदलकर बरेली की सैनिक कॉलोनी दर्ज कराया गया और अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए गए। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर 27 पासबुक-चेकबुक, 12 एटीएम कार्ड, चार मोबाइल और चार सिम समेत कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।
गिरफ्तार युवकों की पहचान दिल्ली के आनंद पर्वत निवासी 20 वर्षीय विशाल और बलजीत नगर निवासी 20 वर्षीय सचिन गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किए जाने की आशंका है। नेटवर्क में एक नाइजीरियाई व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।
ट्रेन में हुई मुलाकात और यहीं से शुरू हुआ खेल
पुलिस पूछताछ के मुताबिक विशाल और सचिन की मुलाकात ट्रेन में सफर के दौरान शोएब से हुई थी। बातचीत में शोएब ने दोनों से उनका काम पूछा। इसके बाद उसने कथित तौर पर कहा कि उसके लिए काम करेंगे तो अच्छी कमाई होगी। काम था अपने नाम से बैंक खाते खुलवाना और आधार कार्ड पर सिम जारी कराकर देना। इसके लिए सबसे पहले दोनों के आधार कार्ड का पता बदलना था। आरोप है कि शोएब ने दोनों को बरेली बुलाया और मोबाइल पर आए ओटीपी की मदद से उनके आधार कार्ड में दिल्ली की जगह इज्जतनगर की सैनिक कॉलोनी का पता दर्ज करा दिया। इसके बाद यूको बैंक में खाता खुलवाया गया और सिम भी लिया गया।
पहले दिए 5 हजार, फिर दो-दो लाख का लालच
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती काम के बाद दोनों को पांच हजार रुपये देकर दिल्ली भेज दिया गया। आरोप है कि इसके बाद दोनों को दो-दो लाख रुपये और देने की बात कही गई। उनसे यह भी कहा गया कि एक सप्ताह बाद फिर बरेली आएं और ऐसे परिचित लोगों को भी साथ लाएं, जो अपने नाम से खाते खुलवाने को तैयार हों। इसके बदले कमीशन देने का भी कथित ऑफर था। विशाल और सचिन ने अपने परिचितों से बात की, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। इसके बाद आठ सितंबर को दोनों खुद ही मोटरसाइकिल से बरेली पहुंच गए। पुलिस के अनुसार, यहां शोएब उन्हें एक रेस्टोरेंट ले गया। इसके बाद अमल सैनी और फुजैर के साथ मिलकर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाने का सिलसिला शुरू हुआ।
13 दिन बरेली में डेरा, दिन में बैंक और रात में रिश्तेदार के घर
पुलिस का दावा है कि विशाल और सचिन करीब 13 दिन तक बरेली में रहे। रात में दोनों मीरगंज क्षेत्र में रहने वाले अपने रिश्तेदार के यहां ठहरते थे और सुबह बरेली आ जाते थे। उनके पेट्रोल से लेकर खाने-नाश्ते और कपड़ों तक का खर्च शोएब उठाता था। इस दौरान दोनों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए गए। खातों की पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड के साथ उनके नाम से सिम भी लिए गए। पुलिस का दावा है कि इन्हीं बैंकिंग किट और सिम को नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाना था।
27 पासबुक-चेकबुक लेकर पहुंचे, पुलिस ने दबोचा
एक अक्तूबर को दोनों फिर बरेली पहुंचे। साइबर क्राइम थाना पुलिस को इसकी भनक लग गई। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने बरेली जंक्शन चौकी के पास सार्वजनिक शौचालय के नजदीक दोनों को पकड़ लिया। तलाशी में चार मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड, अलग-अलग बैंकों की कुल 27 पासबुक/चेकबुक और 12 एटीएम कार्ड मिले। इसके अलावा आधार और पैन कार्ड की छायाप्रतियां तथा कई अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग किट मिलने के बाद पुलिस ने नेटवर्क की परतें खंगालनी शुरू कर दीं।
राजस्थान तक पहुंची एक खाते की कड़ी
पुलिस ने बरामद मोबाइल, बैंक खातों और नंबरों की जांच शुरू की तो मामला बरेली तक सीमित नहीं मिला। समन्वय पोर्टल पर जांच के दौरान एक बैंक खाते के संबंध में राजस्थान के हनुमानगढ़ पुलिस स्टेशन की साइबर शिकायत सामने आई है। विशाल के मोबाइल में संदिग्ध व्हाट्सएप चैट भी मिलने का दावा किया गया है। इन्हीं चैट और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों से शोएब, अमल सैनी और फुजैर से संपर्क की जानकारी सामने आई। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि बरामद खातों में अब तक कितनी रकम आई और किन-किन साइबर फ्रॉड की रकम इनके जरिए इधर से उधर की गई।
गेमिंग-इन्वेस्टमेंट फ्रॉड में खातों के इस्तेमाल की आशंका
साइबर क्राइम पुलिस को आशंका है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों से ठगी गई रकम को ट्रांसफर करने में किया गया या किया जाना था। ऐसे खातों के जरिए रकम एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर उसका ट्रेल जटिल बनाने की आशंका की भी जांच की जा रही है। मामले में एक नाइजीरियाई व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस फिलहाल उसकी पहचान और नेटवर्क से उसके कनेक्शन की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इस नेटवर्क के लिए और कितने लोगों के नाम से खाते और सिम लिए गए।
शोएब और अमल पहले से जेल में, अब रिमांड पर खुलेगा अगला राज
पुलिस के मुताबिक शोएब और अमल सैनी दूसरे मामलों में पहले से जेल में बंद हैं, जबकि फुजैर की तलाश की जा रही है। शोएब को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी है। पुलिस का दावा है कि उससे पूछताछ के बाद विशाल के नाम पर यूको बैंक में खुले खाते की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और सिम समेत अन्य सामान बरामद कराया जा सकता है। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने विशाल और सचिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। दोनों को कोर्ट में पेश किया जा रहा है। अब पुलिस की जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि 27 पासबुक-चेकबुक के पीछे कितने साइबर फ्रॉड और कितनी रकम का खेल छिपा है। पुलिस के मुताबिक विशाल दसवीं पास है और दिल्ली में रैपिडो चलाता है। सचिन 12वीं पास है और स्विगी में काम करता है। दोनों की उम्र 20-20 साल है और स्कूल के समय से दोस्त हैं। पुलिस अब दोनों के बैंक खातों, मोबाइल डेटा और व्हाट्सएप चैट के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।