शाहजहांपुर। संभल में करीब 101 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन के घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) और वर्तमान में शाहजहांपुर नगर निगम में तैनात सहायक नगरायुक्त राज कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। लेखपाल की तहरीर और जांच के आधार पर हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
संभल-मुरादाबाद रोड स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को सुनियोजित तरीके से खुर्द-बुर्द किया गया। आरोप है कि तत्कालीन ईओ राज कुमार गुप्ता और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी भूमि पर फर्जीवाड़ा कर उसे बेच दिया गया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।
फर्जी नामांतरण कर बेच दी गई सरकारी जमीन
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि तत्कालीन ईओ राज कुमार गुप्ता और उप-चकबंदी संचालक ने अपने निजी लाभ के लिए सरकारी जमीन का गबन कराया। आरोप है कि उप-चकबंदी संचालक ने फर्जी लोगों के नाम जमीन का नामांतरण कराया। जब इस मामले में कुछ लोग हाईकोर्ट पहुंचे तो तत्कालीन ईओ ने मुकदमा वापस ले लिया, जिसके बाद जमीन की बिक्री कर दी गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने संभल के लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास तत्कालीन ईओ राज कुमार गुप्ता से जुड़ी किसी अन्य अनियमितता या भ्रष्टाचार की जानकारी हो तो वह पुलिस के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि जो लोग सिस्टम के अंदर रहकर सिस्टम को खाने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी सफाई की जाएगी।
छह साल तक रहे ईओ, पहले भी लगा था गबन का आरोप
राज कुमार गुप्ता करीब छह वर्षों तक संभल नगर पालिका में ईओ के पद पर तैनात रहे। वर्ष 2022 में भी उनके खिलाफ 44 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया था। पुलिस अब उनके पूरे कार्यकाल के दौरान हुई शिकायतों और वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच करेगी। एसपी ने बताया इस मामले में नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। जांच में जिसकी भी संलिप्तता सामने आएगी, उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की जाएगी।
गोरखपुर के मूल निवासी, शाहजहांपुर में तैनात
राज कुमार गुप्ता मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने लखनऊ के चिनहट स्थित गुलजार कॉलोनी में अपना आवास बनाया है। वर्तमान में वह शाहजहांपुर नगर निगम में सहायक नगरायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। सेवानिवृत्ति से पहले ही वह इस बहुचर्चित भूमि घोटाले में गिरफ्तारी के बाद कानूनी शिकंजे में आ गए हैं।