नई दिल्ली। दिल्ली के निजी स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार ने फीस बढ़ोतरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) एक्ट-2025’ लागू कर दिया है। नए कानून के तहत निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले 18 निर्धारित मानकों के आधार पर यह साबित करना होगा कि प्रस्तावित वृद्धि वास्तविक जरूरतों के कारण की जा रही है।
18 पैरामीटर्स पर देना होगा जवाब
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि स्कूलों को अभिभावकों के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि फीस बढ़ोतरी शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं में सुधार के लिए आवश्यक है। इसके समर्थन में स्कूलों को अपने ऑडिट किए गए वित्तीय रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करने होंगे।
फीस बढ़ाने के लिए जिन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देना होगा, उनमें शामिल हैं—
- स्कूल के बुनियादी ढांचे का विकास
- परिवहन (बस) सुविधाओं में सुधार
- स्कूल भवन का निर्माण या विस्तार
- सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना
- बिजली, रोशनी और अन्य आवश्यक सुविधाएं
- नए शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति
- कर्मचारियों का वेतन और अन्य लाभ
- शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता
- प्रयोगशालाओं का विकास
- लाइब्रेरी का विस्तार
- खेल सुविधाओं का विकास
- सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा
- डिजिटल एजुकेशन और स्मार्ट लर्निंग टूल्स
- भवन की मरम्मत और रखरखाव
- स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्थाएं
- प्रशासनिक खर्च
- शिक्षकों का प्रशिक्षण
- अन्य संस्थागत आवश्यकताएं
15 जुलाई तक बनेगी फीस नियमन समिति
सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त (अन-एडेड) स्कूलों को 15 जुलाई तक स्कूल-लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) गठित करने का निर्देश दिया है। समिति में पांच अभिभावक प्रतिनिधि, तीन शिक्षक प्रतिनिधि और स्कूल प्रबंधन के सदस्य शामिल होंगे।
प्रतिनिधियों के चयन से पहले सात दिन की सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। इसके बाद वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ लॉटरी (ड्रा ऑफ लॉट्स) के जरिए पारदर्शी तरीके से चयन किया जाएगा।
31 जुलाई तक जमा करना होगा फीस प्रस्ताव
नए नियमों के अनुसार स्कूलों को अगले तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस प्रस्ताव 31 जुलाई तक एसएलएफआरसी के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण भी जमा करना अनिवार्य होगा। चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर जुर्माना लगाने से लेकर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
‘शिक्षा सेवा है, व्यवसाय नहीं’
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शिक्षा समाज के लिए एक सेवा है, न कि व्यावसायिक गतिविधि। इसी उद्देश्य से सरकार ने फीस निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सभी क्षेत्रीय निदेशकों और जिला अधिकारियों को नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।