बरेली। प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) से निलंबित अलंकार अग्निहोत्री सोमवार को मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे और विभागीय जांच के दौरान अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद उन्होंने कहा कि आरोप पत्र पर दिया गया लिखित जवाब ही उनका आधिकारिक पक्ष है। उन्होंने साफ कहा कि यदि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
26 जनवरी को दिया था इस्तीफा, नारेबाजी के बाद हुए थे निलंबित
अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करने के आरोप में उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पूरे मामले की विभागीय जांच शासन ने मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी थी। सोमवार को तय कार्यक्रम के अनुसार अलंकार अग्निहोत्री मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। जांच अधिकारी के समक्ष उन्होंने अपना पक्ष रखा। बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरोप पत्र का विस्तृत जवाब पहले ही दे चुके हैं और वही उनका अंतिम पक्ष है। अब जांच रिपोर्ट और शासन के फैसले का इंतजार है।
बोले- अपने फैसले पर आज भी कायम हूं
अलंकार ने कहा कि उन्होंने जो फैसला लिया था, उस पर आज भी पूरी तरह अडिग हैं। उनका कहना है कि यदि शासन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करता है तो वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और न्याय के लिए हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर वैधानिक रास्ता अपनाएंगे। मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि सरकारी सेवा से अलग होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा पार्टी का गठन किया है। उनका कहना है कि अब वह सामाजिक और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहेंगे और व्यवस्था में बदलाव के लिए काम करेंगे।
राम मंदिर को लेकर लगाए गंभीर आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े मामलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर से जुड़े कार्यों में हजारों करोड़ रुपये की अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना था कि अब तक केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, जबकि पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अलंकार अग्निहोत्री द्वारा राम मंदिर को लेकर लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।