बरेली। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। बरेली पहुंचे उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया, बल्कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लोग पुलिस की आड़ में आंदोलन में घुस गए थे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
‘पेपर लीक होते रहे हैं’, इस्तीफे की मांग पर भी दो टूक जवाब
डिप्टी सीएम ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं पहले भी होती रही हैं और विपक्ष के कहने से किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं होगा। उनके इस बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के भविष्य के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था पर फिर आमने-सामने सत्ता और विपक्ष
राहुल गांधी और अखिलेश यादव लगातार बेरोजगारी, पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को घेर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। डिप्टी सीएम ने विपक्ष को हताश और निराश बताते हुए कहा कि सरकार विकास और युवाओं के भविष्य के लिए लगातार काम कर रही है।
बयान के बाद तेज हुई सियासी बहस
डिप्टी सीएम के बयान के बाद छात्र आंदोलन और पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष जहां सरकार से जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा विपक्ष पर आंदोलन को भड़काने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक गर्माने के संकेत दे रहा है।