बरेली। बरेली से पकड़े गए 15 साइबर ठगों ने पुलिस के सामने ऐसे राज खोले हैं, जिन्होंने जांच का दायरा कई राज्यों तक बढ़ा दिया है। 80 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी के इस मामले में अब बैंक खातों के जरिए हवाला, फर्जी खाताधारकों और साइबर सिंडिकेट के मास्टरमाइंड की तलाश तेज हो गई है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह देशभर में फैले बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा है।
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के बाद उसे तुरंत नकद निकाल लिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। जांच में कुछ बैंक खातों से ऐसे लेनदेन भी मिले हैं, जिनका किसी वैध कारोबार से संबंध नहीं है। पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी की रकम हवाला चैनल के जरिए आगे भेजी जा रही थी। इसी आधार पर आर्थिक अपराध शाखा और साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। यदि हवाला के पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में अन्य गंभीर धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं।
कई खाताधारक भी रडार पर
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि जिन लोगों के बैंक खाते साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए, वे केवल कमीशन लेकर खाते उपलब्ध कराते थे या सीधे गिरोह का हिस्सा थे। ऐसे खाताधारकों की पहचान की जा रही है, जिनके खातों में अचानक लाखों रुपये का लेनदेन हुआ। कई लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जाने की तैयारी है। महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना और कर्नाटक समेत जिन राज्यों के पीड़ितों के साथ ठगी हुई है, वहां की पुलिस और साइबर थानों से भी संपर्क किया जा रहा है। ठगी के तरीकों, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का मिलान कराया जा रहा है, ताकि नेटवर्क के सरगना तक पहुंचा जा सके।
डिजिटल सबूत होंगे अहम
बरामद 13 मोबाइल फोन, 19 डेबिट कार्ड और अन्य दस्तावेजों से मिले डिजिटल डेटा की जांच के आधार पर कई नए खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल, बैंकिंग ऐप, यूपीआई ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और जांच के आधार पर जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।