बरेली। सेटेलाइट बस अड्डे पर फल के ठेले के नीचे कपड़े में लिपटा मिला दो माह का मासूम आखिर किसका है, इसका पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर पता लगा लिया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस हरदोई के माधौगंज थाना क्षेत्र तक पहुंची और बच्चे के माता-पिता को खोज निकाला। पूछताछ में दंपती ने बच्चे की पहचान करते हुए स्वीकार किया कि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसे बार-बार दौरे पड़ते हैं। आर्थिक तंगी के कारण इलाज न करा पाने की मजबूरी में उन्होंने उसे बस अड्डे पर छोड़ दिया था।
पांच जुलाई की सुबह सेटेलाइट बस अड्डे पर फल के ठेले के नीचे कपड़े में लिपटा रोता हुआ मासूम मिलने से हड़कंप मच गया था। सूचना पर चौकी प्रभारी मयंक भारद्वाज मौके पर पहुंचे और 108 एंबुलेंस की मदद से बच्चे को जिला अस्पताल भेजा। उपचार के बाद उसे चाइल्ड लाइन की देखरेख में सौंप दिया गया था।
सीसीटीवी कैमरे से हुआ खुलासा
पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें एक महिला और पुरुष बच्चे को छोड़कर जाते दिखाई दिए। फुटेज के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और छह जुलाई को हरदोई निवासी स्वाति वाजपेयी और ओमप्रकाश मिश्रा तक पहुंच गई। ओमप्रकाश पल्लेदारी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पूछताछ में दोनों ने बच्चे को अपना बताया और आर्थिक मजबूरी के चलते यह कदम उठाने की बात स्वीकार की।
बच्चे से मिलने की जिद लेकर पहुंचे दंपती
माता-पिता जिला पंचायत स्थित दत्तक ग्रहण एजेंसी पहुंचे और बच्चे से मिलने की जिद करने लगे। वहां मौजूद चाइल्ड लाइन कर्मियों ने उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत होने की सलाह दी। चाइल्ड लाइन का कहना है कि अभी बच्चे की पहचान की औपचारिक पुष्टि होना बाकी है। सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाल कल्याण समिति नियमानुसार आगे का निर्णय लेगी।
एसएसपी बोले, पूरी की जा रही हैं कानूनी औपचारिकताएं
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि बच्चे के माता-पिता की पहचान कर ली गई है। मामले में आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बच्चे के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार लिया जाएगा।