Health Desk: ऑफिस में लगातार बढ़ता काम का दबाव, बेहतर प्रदर्शन की होड़ और नौकरी को लेकर असुरक्षा अब कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर भारी पड़ने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्क प्रेशर और ऑफिस की तनावपूर्ण परिस्थितियां लोगों में एंग्जायटी यानी चिंता संबंधी विकार का खतरा बढ़ा रही हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार करियर में आगे बढ़ने की चाह और लगातार बेहतर परिणाम देने का दबाव कई कर्मचारियों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है। इसका असर न केवल उनकी कार्यक्षमता पर पड़ रहा है, बल्कि निजी जीवन और रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है।
तनाव बढ़ने पर शरीर देता है संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर की “फाइट ऑर फ्लाइट” प्रतिक्रिया सक्रिय हो जाती है। इससे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। नतीजतन व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने लगती है। यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी हो जाता है।
इन उपायों से कम हो सकती है ऑफिस एंग्जायटी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन की शुरुआत सकारात्मक और शांत वातावरण में करें। सुबह उठते ही मोबाइल, ईमेल या ऑफिस के काम में न उलझें। इसके बजाय योग, ध्यान, स्ट्रेचिंग या मॉर्निंग वॉक को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लेने वाले योगाभ्यास और ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी काफी फायदेमंद मानी जाती हैं। इससे दिमाग शांत रहता है और चिंता का स्तर कम होता है।
लगातार बैठना भी बढ़ा सकता है तनाव
ऑफिस में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। विशेषज्ञ हर 20 से 30 मिनट में कुछ देर टहलने या शरीर को सक्रिय रखने की सलाह देते हैं। एक साथ कई काम करने की आदत भी मानसिक थकान और तनाव को बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर होगा कि एक समय में एक ही काम पर फोकस किया जाए। इससे उत्पादकता बढ़ती है और मानसिक दबाव कम होता है।
अच्छी नींद है सबसे बड़ा इलाज
पर्याप्त नींद न लेने से तनाव और चिंता की समस्या और गंभीर हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर ऑफिस एंग्जायटी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।