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जैसलमेर। भारत-पाक सीमा से सटे जैसलमेर में आज रात ऐसा मंजर बनने जा रहा है, जिसे देख हर कोई चौंक जाएगा। पूरा शहर 15 मिनट के लिए अंधेरे में डूब जाएगा, सायरन की गूंज से दिल की धड़कनें तेज होंगी और हर नागरिक को अचानक ‘हवाई हमले’ जैसी स्थिति का अहसास कराया जाएगा। लेकिन यह डर असली नहीं, बल्कि एक बड़े सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा है—जिसका मकसद किसी भी आपात स्थिति के लिए प्रशासन और जनता को तैयार करना है।

सायरन बजते ही थम जाएगा शहर, हर तरफ पसरेगा अंधेरा

आज रात जैसे ही 5 मिनट का लंबा सायरन बजेगा, पूरे जैसलमेर को ‘काल्पनिक खतरे’ की चेतावनी मानकर तुरंत एक्शन लेना होगा। प्रशासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि सायरन बजते ही हर घर, दुकान और वाहन की लाइट बंद करनी होगी। इनवर्टर, जनरेटर और यहां तक कि मोबाइल की टॉर्च का इस्तेमाल भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सड़कों पर चल रहे वाहन भी अपनी हेडलाइट्स बंद कर सुरक्षित स्थान पर रुक जाएंगे। शहर की हाईमास्ट लाइट्स और स्ट्रीट लाइट्स भी एक साथ बुझ जाएंगी, जिससे पूरा इलाका घने अंधेरे में डूब जाएगा।

15 मिनट का अंधेरा, लेकिन बड़ी परीक्षा प्रशासन की

यह ब्लैकआउट सिर्फ 15 मिनट का होगा, लेकिन इन 15 मिनटों में प्रशासन की पूरी मशीनरी का ‘लाइव टेस्ट’ होगा। जब तक 2 मिनट का ‘ऑल क्लियर’ सायरन नहीं बजेगा, तब तक किसी को भी लाइट जलाने की अनुमति नहीं होगी। इस दौरान कंट्रोल रूम, हॉटलाइन और रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम की बारीकी से जांच की जाएगी। पुलिस की क्विक रिस्पांस टीम, एंबुलेंस सेवाएं और फायर ब्रिगेड की तत्परता भी परखी जाएगी। हर विभाग की जिम्मेदारी तय कर दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम से कम रहे।

ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद फिर इतिहास दोहराएगा जैसलमेर

करीब 11 महीने पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सफल आयोजन के बाद एक बार फिर जैसलमेर इस बड़े अभ्यास का गवाह बनने जा रहा है। सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील इस जिले में इस तरह की मॉक ड्रिल बेहद जरूरी मानी जाती है। सीमा के पास स्थित होने के कारण यहां सुरक्षा एजेंसियों को हमेशा हाई अलर्ट पर रहना पड़ता है। यही वजह है कि इस बार का ब्लैकआउट अभ्यास पहले से ज्यादा व्यापक और सख्त नियमों के साथ आयोजित किया जा रहा है।

छात्र बनेंगे ‘सुरक्षा प्रहरी’, युवाओं को मिला बड़ा रोल

इस बार की मॉक ड्रिल की खास बात यह है कि इसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्रशासन ने NCC, NSS और स्काउट-गाइड के छात्रों को सुरक्षा वॉलिंटियर्स के रूप में शामिल होने का आह्वान किया है। इन छात्रों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जहां वे लोगों को नियमों का पालन कराने और जागरूकता फैलाने का काम करेंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को आपदा प्रबंधन के लिए तैयार करना और उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

‘घबराएं नहीं’, प्रशासन की अपील—यह सिर्फ अभ्यास है

जिला प्रशासन ने साफ किया है कि यह कोई वास्तविक खतरा नहीं, बल्कि एक नियमित सुरक्षा अभ्यास है। कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और पूरी जिम्मेदारी के साथ इस ड्रिल में सहयोग करें। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के अभ्यास से न सिर्फ सिस्टम मजबूत होता है, बल्कि आम नागरिक भी संकट के समय सही प्रतिक्रिया देना सीखते हैं।

सरहद की सुरक्षा का संदेश: हर नागरिक बने जिम्मेदार

इस ब्लैकआउट ड्रिल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सुरक्षा सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। जब पूरा शहर एक साथ अंधेरे में डूबेगा, तब यह एकजुटता और अनुशासन की मिसाल पेश करेगा। जैसलमेर जैसे सीमावर्ती इलाके में इस तरह के अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि अगर कभी वास्तविक संकट आता है, तो हर व्यक्ति अपनी भूमिका को समझे और बिना घबराए सही कदम उठाए।

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