अलीगढ। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पांच साल पुराने चर्चित हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले की सबसे अहम कड़ी बनी एक 6 साल की मासूम बच्ची, जिसने अदालत में खड़े होकर अपने पिता के हत्यारों की पहचान की और न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। कोर्ट ने तीनों दोषियों पर कुल 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से बड़ी राशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया गया है।
अदालत का सख्त फैसला, तीनों दोषियों को उम्रकैद
एडीजे-11 पीके जयंत की अदालत ने इस मामले में विवेक शर्मा, मोहित शर्मा और योगेंद्र पंडित को हत्या और लूट का दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन पर 10.80 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि वसूले गए जुर्माने में से 9 लाख रुपये मृतक के बच्चों की परवरिश के लिए दिए जाएं। यह फैसला न सिर्फ कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, न्याय मिलकर ही रहता है।
6 साल की बेटी बनी केस की सबसे मजबूत गवाह
इस पूरे केस की सबसे बड़ी और भावनात्मक कड़ी रही मृतक विकास सक्सैना की बेटी ईवा। घटना के समय वह मात्र 6 साल की थी और उसने अपनी आंखों के सामने अपने पिता की हत्या होते देखी। अदालत में जब ईवा ने गवाही दी, तो उसने साफ-साफ बताया कि घटना की रात उसने अपने पड़ोस में रहने वाले तीनों आरोपियों को घर के अंदर देखा था। उसने यह भी बताया कि तीनों उसके पिता से झगड़ा कर रहे थे और फिर अचानक हमला कर दिया। ईवा की इस गवाही ने पूरे केस को मजबूत आधार दिया और अदालत के सामने सबसे ठोस सबूत बनकर उभरी।
आधी रात को दीवार फांदकर घर में घुसे आरोपी
यह सनसनीखेज वारदात 20 जनवरी 2021 की देर रात की है। थाना सासनी गेट क्षेत्र के कृष्णा विहार कॉलोनी में रहने वाले विकास सक्सैना उस समय घर पर अपनी बेटी के साथ अकेले थे। उनकी पत्नी बदायूं जिले में शिक्षिका थीं और नौकरी के कारण बाहर रहती थीं। रात के समय तीनों आरोपी दीवार फांदकर घर में घुस गए। उन्होंने विकास सक्सैना को दबोच लिया और पहले उनसे झगड़ा किया। इसके बाद आरोपियों ने आरओ के पाइप और प्लास्टिक की रस्सी से उनका गला घोंट दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के साथ लूट की वारदात भी
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने हत्या के साथ-साथ लूटपाट भी की थी। यही वजह थी कि इस मामले में हत्या के साथ लूट की धाराएं भी लगाई गईं। पुलिस ने शुरुआती जांच में ही संदेह के आधार पर आरोपियों को हिरासत में लिया और बाद में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया।
पुलिस जांच और पैरवी ने दिलाई सजा
इस केस में पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एडीजीसी परमेंद्र जैन ने बताया कि गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी माना। उन्होंने कहा कि मासूम बच्ची की गवाही इस मामले में निर्णायक साबित हुई। इसके अलावा अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने भी आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस घटना के बाद मृतक का परिवार पूरी तरह टूट गया था। एक तरफ पिता की हत्या, दूसरी तरफ मासूम बच्ची के सामने हुई यह दर्दनाक घटना—इसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। अदालत द्वारा जुर्माने की राशि बच्चों की परवरिश के लिए देने का आदेश पीड़ित परिवार के लिए एक राहत जरूर है, लेकिन इस घटना की पीड़ा को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता।
समाज के लिए सबक: बच्चों की गवाही भी बन सकती है मजबूत आधार
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि बच्चों की गवाही को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कई बार समाज में यह धारणा होती है कि छोटे बच्चे सटीक गवाही नहीं दे सकते, लेकिन इस केस ने यह साबित कर दिया कि अगर बच्चा घटना का प्रत्यक्षदर्शी है, तो उसकी गवाही बेहद अहम हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालतें अब बच्चों की गवाही को भी परिस्थितियों के अनुसार महत्व देने लगी हैं, खासकर जब वह सुसंगत और स्पष्ट हो।