तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने ऐसा जवाब दिया है, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो जवाब इतना बड़ा होगा कि “दुनिया की एक तिहाई तेल सप्लाई खत्म हो सकती है”। इस बयान ने वैश्विक बाजार, खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
ट्रंप की चेतावनी: “तबाह कर देंगे ईरान का ढांचा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर वार्ता असफल होती है, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने कहा कि ईरान को एक “अच्छी डील” का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन अगर वह इसे नहीं मानता तो उसके पावर प्लांट, पुल और महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सख्त कदम उठाने को तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं पहले से ही कमजोर पड़ चुकी हैं।
ईरान का जवाब: “तेल की सप्लाई ठप कर देंगे
ट्रंप की धमकी के कुछ ही घंटों बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तीखा पलटवार किया। ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका ने उनके पावर प्लांट या किसी भी महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया, तो जवाब में खाड़ी क्षेत्र की तेल सुविधाओं पर हमला किया जाएगा। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि ऐसे हमले किए जाएंगे, जिससे दुनिया की करीब एक तिहाई तेल सप्लाई ठप हो सकती है। यह न सिर्फ अमेरिका बल्कि उसके सहयोगी देशों के लिए भी भारी संकट पैदा करेगा। ईरान ने साफ कर दिया कि वह “हर संभव बड़े कदम” उठाने के लिए तैयार है और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
निशाने पर खाड़ी की तेल सुविधाएं
ईरानी मीडिया और आईआरजीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी सऊदी अरामको और यानबू ऑयल फैसिलिटी, साथ ही यूएई की फुजैरा पाइपलाइन को संभावित निशाने के रूप में देखा जा रहा है। इन स्थानों पर हमला होने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला हुआ, तो तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ा खतरा
खाड़ी क्षेत्र का सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस तनाव के केंद्र में आ गया है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां कोई सैन्य कार्रवाई या नाकेबंदी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा। ईरान पहले भी इस मार्ग को बंद करने की धमकी दे चुका है।
वार्ता से पीछे हटा ईरान
तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से भी फिलहाल दूरी बना ली है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने की अभी कोई योजना नहीं है। ईरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को भी समझौतों का उल्लंघन बताया है और कहा है कि जब तक यह घेरा जारी रहेगा, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
सहयोगी देशों पर भी मंडराया खतरा
आईआरजीसी ने यह भी संकेत दिया है कि अगर युद्ध की स्थिति बनती है, तो अमेरिका के सहयोगी देश भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश सीधे निशाने पर आ सकते हैं। इसका मतलब यह है कि यह टकराव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है।
वैश्विक बाजार में हलचल
ईरान की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है। तेल कंपनियों और निवेशकों की नजर अब खाड़ी क्षेत्र पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारत समेत दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों की राय: “यह सिर्फ बयानबाजी नहीं”
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। ईरान की सैन्य क्षमता और उसकी रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि एक संभावित बड़े टकराव की चेतावनी है।