बदायूं। बिसौली नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक खूंखार और रहस्यमयी डॉग का आतंक चरम पर है। रविवार रात एक शादी समारोह में अचानक हुए हमले ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। बताया जा रहा है कि यह डॉग बिना किसी उकसावे के लोगों पर टूट पड़ रहा है और अब तक 200 से ज्यादा लोगों को घायल कर चुका है। हालात ऐसे हैं कि लोग घरों से निकलने तक में डर रहे हैं।
शादी की खुशियां चीखों में बदलीं, मैरिज हॉल बना ‘खौफ का मैदान’
रविवार रात बिसौली के एक मैरिज हॉल में शादी समारोह चल रहा था। बारातियों की चहल-पहल और खुशियों के बीच अचानक एक ब्राउन रंग का, शेर जैसा दिखने वाला खतरनाक डॉग अंदर घुस आया। किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसने मेहमानों पर हमला बोल दिया। डॉग की आक्रामकता इतनी ज्यादा थी कि उसने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं छोड़ा। देखते ही देखते वहां भगदड़ मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे, कई गिर पड़े और घायल हो गए। कुछ ही मिनटों में खुशी का माहौल दहशत और चीख-पुकार में बदल गया।
नगर से निकलकर गांवों में फैला आतंक, खेतों में भी नहीं सुरक्षित लोग
मैरिज हॉल से भगाए जाने के बाद भी यह खूंखार डॉग शांत नहीं हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह नगर से निकलकर आसपास के गांवों और खेतों की ओर बढ़ गया। वहां काम कर रहे किसानों और ग्रामीणों पर भी उसने हमला करना शुरू कर दिया। खेतों में काम कर रहे मजदूरों और किसानों पर अचानक हुए हमले से लोग बुरी तरह सहम गए। कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉग बेहद तेज और आक्रामक है, जिससे बच पाना मुश्किल हो रहा है।
अस्पतालों में लगी कतार, एंटी-रेबीज टीकों की मारामारी
घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसौली में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे। अस्पताल में लंबी कतारें लग गईं। अब तक 80 से ज्यादा लोगों को सरकारी अस्पताल में टीके लगाए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य लोग निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने भी अचानक बढ़े मरीजों के दबाव को संभालना चुनौती बन गया है। डॉक्टरों का कहना है कि डॉग का व्यवहार बेहद असामान्य और खतरनाक है, जिससे रेबीज की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
‘पालतू या आवारा?’ रहस्य बना डॉग, प्रशासन की पकड़ से दूर
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यह डॉग किसी का पालतू हो सकता है, जिसे बीमार या आक्रामक होने के बाद छोड़ दिया गया। हालांकि इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगातार हमलों के बावजूद यह डॉग अब तक पकड़ में नहीं आ सका है। नगर और ग्रामीण इलाकों में उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
दहशत में जी रहे लोग, घरों में कैद होने को मजबूर
बिसौली नगर और आसपास के गांवों में भय का माहौल साफ देखा जा सकता है। लोग जरूरी काम के अलावा घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। बच्चों को अकेले बाहर भेजना पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय हालात और भी डरावने हो जाते हैं। लोग समूह में निकलने को मजबूर हैं। हर आहट पर लोगों को उसी डॉग का खौफ सताने लगता है।
200 से ज्यादा हमलों की चर्चा, प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस डॉग ने अब तक 200 से ज्यादा लोगों को काटा या घायल किया है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ा कम बताया जा रहा है, लेकिन हालात की गंभीरता किसी से छिपी नहीं है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन समय रहते सक्रिय होता तो इतने लोग घायल नहीं होते। नगर पंचायत और पशु विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कब खत्म होगा ‘खूंखार डॉग’ का आतंक?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस खूंखार डॉग का आतंक कब खत्म होगा। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। यदि जल्द ही इस डॉग को पकड़ने या काबू करने की कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। बिसौली के लोग अब प्रशासन से तुरंत राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।