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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और उन्हें भविष्य की किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। वहीं मेरठ में सहकारिता विभाग के एक अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज होने से सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के दो बड़े चेहरे एक साथ बेनकाब हो गए हैं।

भ्रष्टाचार पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज होती नजर आ रही है। हाल ही में शासन ने दो अलग-अलग मामलों में कड़े कदम उठाते हुए सरकारी तंत्र में फैली अनियमितताओं पर सख्त संदेश दिया है। पहले मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं दूसरे मामले में मेरठ में सहकारिता विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

15 में से 14 आरोप साबित

शासन की ओर से की गई जांच में शेषनाथ पांडेय के खिलाफ लगाए गए 15 आरोपों में से 14 आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्यों और आरोपी अधिकारी के जवाबों का परीक्षण करने के बाद सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया। इसके बाद शासन ने उन्हें न सिर्फ सेवा से बर्खास्त किया बल्कि भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया। यह फैसला राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया।

प्रमुख सचिव ने जारी किया आदेश

अल्पसंख्यक कल्याण एवं मुस्लिम वक्फ विभाग की प्रमुख सचिव संयुक्ता समद्दार की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया। आदेश में बताया गया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि संबंधित अधिकारी ने कई मामलों में वित्तीय अनियमितताएं कीं, नियमों का उल्लंघन किया और तथ्यों को छिपाने की कोशिश भी की।

मदरसे में अवैध वेतन भुगतान का मामला

जांच के दौरान सबसे गंभीर मामला मदरसे में अवैध वेतन भुगतान से जुड़ा सामने आया। आरोप है कि एक ऐसे व्यक्ति के लिए वेतन भुगतान का आदेश जारी कर दिया गया जिसकी सेवा पहले ही समाप्त हो चुकी थी। बिना किसी वैध पुनर्नियुक्ति आदेश के वित्तीय स्वीकृति बहाल कर दी गई, जिससे एक ही पद पर दो लोगों को वेतन भुगतान की स्थिति बन गई। सरकारी नियमों के मुताबिक इसे वित्तीय अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना गया।

नियमों के खिलाफ फैसले

जांच में यह भी सामने आया कि शेषनाथ पांडेय ने कई मामलों में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लिए। यह निर्णय उत्तर प्रदेश अशासकीय मदरसा विनियमावली 1987 और संशोधित विनियमावली 2016 के प्रावधानों के विपरीत पाए गए। शासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे 23 फरवरी 2026 को लोक सेवा आयोग के पास भेजा था।

लोक सेवा आयोग की सहमति

लोक सेवा आयोग ने मामले की समीक्षा के बाद 28 फरवरी को प्रस्तावित दंड पर अपनी सहमति दे दी। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर अधिकारी की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया। इस आदेश के साथ ही उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई भी समाप्त कर दी गई।

मेरठ में सहकारिता अफसर पर भी कार्रवाई

इसी क्रम में मेरठ में सहकारिता विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की गई है। तत्कालीन सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक हरेंद्र कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। विजिलेंस की जांच में सामने आया कि उनके पास करीब 68.57 लाख रुपये की अघोषित संपत्ति पाई गई।

गोपनीय जांच में खुलासा

सरकार ने वर्ष 2022 में हरेंद्र कुमार की चल-अचल संपत्तियों की गोपनीय जांच के आदेश दिए थे। जांच में पाया गया कि 1997 से 2000 के बीच उन्होंने वैध स्रोतों से लगभग 2.63 करोड़ रुपये की आय अर्जित की थी। लेकिन इसी अवधि में संपत्तियों की खरीद और पारिवारिक खर्चों पर करीब 3.29 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए।

आय से ज्यादा खर्च का मामला

इस प्रकार उनकी आय और खर्च के बीच लगभग 68.57 लाख रुपये का अंतर सामने आया। जब विजिलेंस ने इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

इन दोनों मामलों को सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति के तहत बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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