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गोरखपुर। यूपी के गोरखपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां हाईस्कूल में 78 प्रतिशत अंक लाने के बावजूद पिता की नाराजगी एक मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ गई। सहजनवा थाना क्षेत्र के तिलौरा गांव में 16 वर्षीय आराध्या द्विवेदी उर्फ राधा ने पिता की डांट-फटकार से आहत होकर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और अभिभावकों के बढ़ते दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिजल्ट आया, लेकिन खुशी नहीं मिली

15 अप्रैल को सीबीएसई बोर्ड का दसवीं का परिणाम घोषित हुआ। राधा ने 78% अंक हासिल किए थे, जो सामान्य परिस्थितियों में एक अच्छा प्रदर्शन माना जाता है। लेकिन उसके पिता दुर्गेशधर द्विवेदी इस परिणाम से खुश नहीं थे। परिजनों के मुताबिक, रिजल्ट देखने के बाद पिता ने बेटी को जमकर डांटा और उसके भविष्य को लेकर ताने दिए। लगातार हो रही फटकार और मानसिक दबाव से राधा अंदर से टूट गई।

डांट से आहत होकर उठाया खौफनाक कदम

पिता की डांट से आहत होकर राधा ने घर में ही जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी। जब पिता को इसका पता चला तो वह घबराकर बेटी को अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है।

कार की डिग्गी में मिला बेटी का शव

घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब पिता बेटी का शव घर लेकर लौटा और कार की डिग्गी में ही रख दिया। उस समय घर पर पत्नी और बेटा मौजूद नहीं थे। जब पत्नी वापस लौटी और बेटी के बारे में पूछा, तो पिता टालमटोल करता रहा। शक होने पर जब पत्नी ने कार की डिग्गी खोली, तो बेटी का शव देखकर वह बेसुध हो गई। मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए और पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

घटना के बाद फरार हुआ आरोपी पिता

मामला बिगड़ता देख आरोपी पिता मौके से फरार हो गया। इसके बाद पत्नी ने थाने पहुंचकर पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। तहरीर में आरोप लगाया गया कि पति ने बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, उसे ताने दिए और आत्महत्या के लिए उकसाया।

पुलिस ने किया गिरफ्तार, भेजा जेल

मामले की गंभीरता को देखते हुए सहजनवा थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। आरोपी पिता दुर्गेशधर द्विवेदी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। थाना प्रभारी Mahesh Chaubey ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

गांव में पसरा मातम, हर कोई सदमे में

राधा की मौत के बाद तिलौरा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिस घर में कुछ दिन पहले परीक्षा परिणाम को लेकर चर्चा हो रही थी, वहां अब मातम का माहौल है। पड़ोसियों का कहना है कि राधा एक शांत स्वभाव की और पढ़ाई में ठीक-ठाक छात्रा थी। किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी।

अभिभावकों के दबाव पर उठे बड़े सवाल

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रहे हैं? 78% जैसे अच्छे नंबर भी अगर असफलता माने जाएं, तो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका कितना गहरा असर पड़ता है, इसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को प्रोत्साहित करने के बजाय लगातार डांटना और तुलना करना उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बना सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य को समझना जरूरी

आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में बच्चों पर पढ़ाई का दबाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।जरूरत इस बात की है कि बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए, न कि उन पर अवास्तविक उम्मीदों का बोझ डाला जाए।

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