बरेली। गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना को ही कमाई का जरिया बनाने वाले गिरोह का भोजीपुरा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। अपात्र लोगों से 35 से 40 हजार रुपये वसूले जाते, आधार और राशन कार्ड में नाम-पते से छेड़छाड़ कर आयुष्मान कार्ड तैयार कराया जाता और फिर पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का रास्ता खोल दिया जाता। पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर फर्जी आयुष्मान, आधार और राशन कार्ड से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।
बुधवार को एसपी उत्तरी मुकेश मिश्रा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे खेल की परत तब खुली जब नवाबगंज क्षेत्र के हरप्रसाद अपनी बेटी को इलाज के लिए ऋषिकेश AIIMS लेकर पहुंचे। आरोप है कि आबिद और उसके साथियों ने हरप्रसाद से 47 हजार रुपये लेकर उनके और उनकी बेटी के आधार कार्ड में हेरफेर कर आयुष्मान कार्ड तैयार कराया था। अस्पताल में कार्ड की असलियत सामने आई तो इलाज नहीं हो सका। हरप्रसाद ने रुपये वापस मांगे तो उन्हें टरकाया जाने लगा। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और भोजीपुरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस पूछताछ में सामने आए दावे इस कथित नेटवर्क की पूरी कहानी बताते हैं। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि अपात्र लोगों को मुफ्त इलाज का लालच देकर उनसे आधार और राशन कार्ड लिए जाते थे। इनमें फर्जी तरीके से नाम-पते दर्ज कर आयुष्मान कार्ड बनवाए जाते और बदले में प्रत्येक व्यक्ति से करीब 35 से 40 हजार रुपये वसूले जाते थे। इसके बाद इन्हीं कार्डों से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अस्पतालों में इलाज कराने का दावा है।
मरीज से भी कमाई, सरकारी योजना से भी भुगतान का आरोप
पुलिस का आरोप है कि खेल सिर्फ फर्जी कार्ड बनाने तक सीमित नहीं था। कथित तौर पर अपात्र व्यक्ति से कार्ड बनवाने के नाम पर मोटी रकम लेने के बाद अस्पताल में उसका इलाज कराया जाता और आयुष्मान योजना के तहत भुगतान हासिल किया जाता था। यानी एक तरफ मरीज से हजारों रुपये की वसूली और दूसरी तरफ सरकारी योजना की धनराशि पर भी नजर थी। पुलिस ने इसी आधार पर मामले को संगठित अपराध मानते हुए मुकदमे में बीएनएस की धारा 111 भी बढ़ाई है। मामले में सबसे गंभीर पहलू अस्पताल कर्मियों से कथित मिलीभगत का है। पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक एफआईआर में राममूर्ति अस्पताल के कर्मचारी नितिन, नरेश और अस्पताल से जुड़े कुछ अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में भी अस्पताल कर्मचारियों की कथित मदद से अपात्र लोगों का इलाज कराने की बात कही है। हालांकि ये आरोप अभी पुलिस की विवेचना का हिस्सा हैं और संबंधित लोगों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
संभल CMO ऑफिस तक नेटवर्क का दावा
पूछताछ में आरोपियों ने नरेश नाम के एक व्यक्ति का भी जिक्र किया है। पुलिस प्रेस नोट में आरोपियों के बयान के अनुसार वह मुरादाबाद का रहने वाला है और संभल सीएमओ कार्यालय में काम करता है। आरोपियों ने उसके भी इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने का दावा किया है। पुलिस अब इन दावों और नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है। इस नेटवर्क में किसी बड़े सेटअप की जरूरत भी नहीं थी। पुलिस पूछताछ के मुताबिक आरोपी अपने मोबाइल फोन से ऐप और पोर्टल के जरिये आधार, राशन और आयुष्मान कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया करते थे। काम पूरा होने के बाद किसी दुकान से प्रिंट निकलवा लिया जाता था। पुलिस को आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन मिले हैं, जिनकी जांच से नेटवर्क की और कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
अस्पताल के बॉयज हॉस्टल के पीछे पांचों दबोचे
पुलिस को सूचना मिली थी कि इस मुकदमे से जुड़े आरोपी राममूर्ति अस्पताल के पीछे प्रहलादपुर जाने वाले रास्ते पर ट्यूबवेल के पास मौजूद हैं और कुछ लोगों के आने का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस ने बुधवार सुबह करीब 7:58 बजे दबिश देकर आबिद, सलमान, अरमान, अफरोज और देशरत्न को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि वहां भी कुछ लोगों से आयुष्मान कार्ड बनाने के सिलसिले में बातचीत होनी थी। तलाशी में पुलिस ने सात मोबाइल फोन, 13 कथित कूटरचित आयुष्मान कार्ड, छह कूटरचित आधार कार्ड, राशन कार्ड की 22 कूटरचित छायाप्रतियां और 2700 रुपये नकद बरामद किए। पांचों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना समेत बीएनएस की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई है।
कितने फर्जी कार्ड, कितने अस्पताल और कितना सरकारी भुगतान
पांच गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा बड़ा हो सकता है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित गिरोह ने अब तक कितने अपात्र लोगों के कार्ड बनवाए, उनसे कितनी रकम वसूली गई, किन-किन अस्पतालों में इन कार्डों पर इलाज हुआ और आयुष्मान योजना से कितनी सरकारी धनराशि का भुगतान लिया गया। पुलिस प्रेस नोट में इन सवालों की कुल संख्या या रकम का आंकड़ा नहीं दिया गया है। गिरफ्तार आरोपी आबिद का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ वर्ष 2021 में प्रेमनगर थाने में चोरी, बरामदगी और धोखाधड़ी से जुड़ा मुकदमा तथा वर्ष 2022 में भोजीपुरा थाने में आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज हुआ था। मौजूदा मुकदमे को मिलाकर पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ तीन मामले बताए गए हैं।