इस्लामाबाद। वैश्विक राजनीति में हलचल मचाने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता आखिरकार बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। JD Vance के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 21 घंटे लंबी बातचीत के बाद इस्लामाबाद से लौट गया, लेकिन दोनों देशों के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। ईरान ने साफ शब्दों में अमेरिकी शर्तों को खारिज कर दिया है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
‘साफ मना’: तेहरान ने अमेरिकी शर्तों को किया खारिज
ईरान के घाना स्थित दूतावास ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि तेहरान ने अमेरिका की मांगों को “साफ तौर पर ठुकरा दिया”। ईरान का आरोप है कि वॉशिंगटन बातचीत में ईमानदारी नहीं दिखा रहा और ऐसी रियायतें मांग रहा है, जिन्हें वह युद्ध के जरिए भी हासिल नहीं कर सका। ईरान का यह भी कहना है कि अमेरिका बातचीत को विफल बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। इस बयान ने साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी गहरी है।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता में सबसे जटिल मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर सामने आया। ईरान ने संकेत दिए कि जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक इस अहम समुद्री रास्ते की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर कोई समझौता न होना अंतरराष्ट्रीय चिंता को बढ़ा रहा है।
अमेरिका का दावा: ‘आखिरी और बेहतरीन प्रस्ताव’ भी ठुकराया
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस्लामाबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान अपना “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” रखा था। उनका दावा था कि अमेरिकी टीम ने काफी लचीलापन दिखाया, लेकिन ईरान ने कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया। वेंस के मुताबिक इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान स्पष्ट और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दे कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
ईरान का पलटवार: ‘गलत आकलन कर रहा अमेरिका’
ईरान की सरकारी Mehr News Agency के मुताबिक तेहरान ने वार्ता के दौरान कई व्यावहारिक प्रस्ताव पेश किए, लेकिन अमेरिका ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने न सिर्फ युद्ध के दौरान बल्कि अब कूटनीतिक वार्ता में भी गलत आकलन किया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान को किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन मुद्दे भी बने बाधा
वार्ता में सिर्फ परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को लेकर भी चर्चा हुई। अमेरिका चाहता है कि ईरान इन क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों को सीमित करे, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा मामला मानता है। यही वजह है कि इन मुद्दों पर भी कोई सहमति नहीं बन सकी और बातचीत गतिरोध में फंस गई।
‘खाली हाथ’ लौटा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
ईरान के दूतावास ने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल “खाली हाथ” लौट गया। साथ ही यह भी कहा गया कि होर्मुज स्ट्रेट अब भी बंद है, जिससे साफ है कि मुख्य मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों देशों के बीच टकराव फिलहाल खत्म होने के बजाय और गहरा सकता है।
अगले दौर की बातचीत पर अनिश्चितता
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बातचीत के अगले दौर को लेकर कोई तारीख या स्थान तय नहीं किया गया है। यानी फिलहाल दोनों देशों के बीच संवाद पूरी तरह ठप पड़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष अपने रुख में नरमी नहीं दिखाते, तब तक किसी भी तरह के समझौते की संभावना बेहद कम है।
वैश्विक असर: तेल बाजार से लेकर सुरक्षा तक खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खासतौर पर तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ता है, तो दुनिया की तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी।