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बरेली। किला छावनी के रहने वाले युवक को साइबर ठग ने रिश्तेदार बनकर फोन किया। लंदन में फंसे होने और वीजा के लिए तत्काल रुपये की जरूरत बताकर युवक को ऐसा भरोसे में लिया कि उसने एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार में करीब 1.80 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेज दिए। ठगी के कुछ देर बाद जब युवक ने अपने असली रिश्तेदार को फोन किया तो पूरा खेल खुल गया। इसके बाद उसके होश उड़ गए।

पीड़ित अजय सक्सेना के मुताबिक, 12 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को उनका मौसेरा भाई विकास बताया, जो लंदन में रहता है। फोन करने वाले की आवाज भी असली रिश्तेदार से मिलती-जुलती थी। इसी वजह से अजय को उस पर शक नहीं हुआ। इसके बाद दोनों के बीच मैसेज के जरिए भी बातचीत हुई।

वीजा के नाम पर मांगे रुपये, भेज दिया क्यूआर कोड

ठग ने अजय से कहा कि वह बड़ी परेशानी में है और घर आने के लिए वीजा जारी कराना है। इसके लिए तत्काल रुपयों की जरूरत है। इसके बाद उसने एक क्यूआर कोड भेजते हुए करीब 1.80 लाख रुपये की जरूरत बताई। साथ ही एक कथित एजेंट का नंबर देकर उससे बात करने को कहा। अजय के मुताबिक, ठग के कहने पर उन्होंने अपने खाते से 25-25 हजार रुपये की दो रकम ट्रांसफर कीं। इसके बाद पत्नी के जरिए 50 हजार रुपये और अलग-अलग लोगों के माध्यम से भी रकम भेजी गई। शिकायत में 20 हजार, 18 हजार और दो हजार रुपये समेत कई ट्रांजेक्शन का जिक्र किया गया है। इस तरह ठग के बताए खातों में करीब 1.80 लाख रुपये पहुंच गए।

असली रिश्तेदार को फोन किया तो सामने आया साइबर ठगी का राज

रुपये भेजने के कुछ समय बाद अजय को शक हुआ। उन्होंने अपने असली रिश्तेदार विकास को फोन किया। विकास ने साफ बताया कि उसने न तो कोई फोन किया था और न ही रुपये मांगे थे। यह सुनते ही अजय को समझ आ गया कि साइबर ठग ने रिश्तेदार की आवाज का सहारा लेकर उनके साथ ठगी की है। ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद किला थाने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पीड़ित ने ठगों के खातों को फ्रीज कराने और ठगी की रकम वापस दिलाने की मांग की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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