बरेली। रविवार को डीएम अविनाश सिंह निरीक्षण पर निकले तो यूएस मैमोरिल पब्लिक स्कूल में बिना बीडीए की मंजूरी निर्माण होता मिला। डीएम ने मौके पर ही अफसरों से जवाब मांगा और कार्रवाई का आदेश दे दिया। इसके बाद बीडीए की टीम पहुंची और निर्माण को सील कर दिया। स्कूल में चल रहे दूसरे निर्माण भी तत्काल रुकवा दिए गए।
मामला प्रेमनगर थाना क्षेत्र के सैदपुर हाकिंस स्थित बालाजी विहार, नर्सरी रोड के पास का है। रविवार को डीएम अविनाश सिंह क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान यूएस मैमोरिल पब्लिक स्कूल में हो रहे निर्माण की तरफ उनका ध्यान गया। डीएम ने अधिकारियों से निर्माण और उसकी स्वीकृति के संबंध में जानकारी मांगी। इसके बाद निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू हुई। बीडीए के मुताबिक शिव कुमार की ओर से करीब 180 वर्ग मीटर में पहले से बने भूतल के ऊपर प्रथम तल पर सामुदायिक सुविधा का निर्माण कराया जा रहा था। प्राधिकरण से इसकी स्वीकृति नहीं ली गई थी। बिना मंजूरी निर्माण का मामला सामने आने के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
DM का आदेश मिलते ही हरकत में आया BDA
डीएम के निर्देश के बाद बीडीए की प्रवर्तन टीम मौके पर पहुंची। टीम ने निर्माण से संबंधित स्थिति की जांच की और इसके बाद उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 28 (क) के तहत कार्रवाई करते हुए निर्माण को सील कर दिया। इसके साथ ही मौके पर चल रहे अन्य आवासीय निर्माण कार्य भी बंद करा दिए गए। रविवार को डीएम के निरीक्षण के दौरान मामला सामने आने और उसके बाद बीडीए की कार्रवाई से इलाके में हलचल रही। पहले निर्माण की स्वीकृति को लेकर पड़ताल हुई और इसके बाद प्रवर्तन टीम ने सीलिंग की कार्रवाई की। बीडीए का कहना है कि विकास क्षेत्र में बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराया तो चलेगा बुलडोजर
बीडीए ने भवन और भूखंड मालिकों को भी चेताया है कि किसी भी तरह का निर्माण या प्लॉटिंग शुरू करने से पहले प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराना जरूरी है। बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण को अवैध माना जाएगा। ऐसे निर्माण पर सीलिंग के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है। प्राधिकरण ने संपत्ति खरीदने वालों से कहा है कि मकान या भूखंड का सौदा करने से पहले उसके स्वीकृत मानचित्र की जांच जरूर कर लें। केवल मौके पर निर्माण देखकर खरीदारी करना बाद में परेशानी का कारण बन सकता है। नक्शा स्वीकृत नहीं होने पर संबंधित संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।