बरेली। शहर में ऑनलाइन फर्जी दवा बेचने का धंधा चल रहा था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देकर लोगों को तीन दिन में शुगर खत्म करने का झांसा दिया जाता था। फिर फोन पर ऑर्डर लेकर कैश ऑन डिलीवरी दवा घर भेजी जाती थी। बारादरी पुलिस ने सैलानी के एक मकान में छापा मारा तो पूरा खेल खुल गया। मौके से तीन आरोपी पकड़े गए, जबकि दो फरार हो गए।
बारादरी पुलिस को सूचना मिली थी कि सैलानी में यादगार रेस्टोरेंट के पास एक मकान में ऑनलाइन दवाएं बेचने का काम चल रहा है। पुलिस ने शनिवार को मकान पर छापा मारा। अंदर मोबाइल और लैपटॉप पर काम करते लोग मिले। यहीं से ग्राहकों के फोन उठाए जाते और दवाओं के ऑर्डर लिए जाते थे। पुलिस ने मौके से साजिद मलिक, इस्लाम और मो. जफर को गिरफ्तार कर लिया। छानबीन में 14 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, 75 पैकेट दवा, फर्जी बताए जा रहे बिल, शिपिंग लेबल और वेबसाइट से जुड़ा डेटा मिला।
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर डालते थे ऐसा विज्ञापन कि मरीज फंस जाए
पुलिस के मुताबिक इस्लाम इस पूरे काम का टेक्निकल हिस्सा संभालता था। उसने Shopify पर वेबसाइट बनाई थी। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शुगर के मरीजों को निशाना बनाकर विज्ञापन चलाए जाते थे। इनमें दावा किया जाता था कि उनकी दवा से तीन दिन में शुगर 100 फीसदी ठीक हो जाएगी। विज्ञापन देखकर कोई व्यक्ति फोन करता तो उससे बीमारी की जानकारी लेकर दवा खरीदने के लिए तैयार किया जाता। ऑर्डर पक्का होते ही पार्सल तैयार होता और कैश ऑन डिलीवरी कूरियर से उसके घर पहुंचा दिया जाता।
असली दिखाने के लिए पार्सल में रखते थे फर्जी बिल
पुलिस की पूछताछ में साजिद ने बताया कि उसने अपने भाई रऊफ और रिजवान के साथ मिलकर यह काम शुरू किया था। ग्राहकों को शक न हो, इसके लिए अलग-अलग कंपनियों के नाम से बिल तैयार किए जाते थे। बिल की एक कॉपी दवा के साथ ग्राहक को भेजी जाती थी और दूसरी अपने पास रखी जाती थी। दवा के पैकेट पर Diabo Diabetic Powder और Brahm Sugar Care जैसे नाम मिले हैं। पुलिस ने ऐसे 75 पैकेट कब्जे में लिए हैं।
बरेली में बैठकर बताते थे- हमारी कंपनी अल्मोड़ा में है
इस पूरे खेल में कंपनी का पता भी बदल दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक ग्राहकों को बताया जाता था कि कंपनी उत्तराखंड के अल्मोड़ा में है। जबकि ऑर्डर लेने और पार्सल भेजने का काम बरेली से हो रहा था। सैलानी के मकान में यह काम करीब एक महीने से चल रहा था। इससे पहले यही सेटअप सीबीगंज इलाके में था। वहां से सामान समेटकर आरोपी सैलानी आ गए और मकान के अंदर दोबारा काम शुरू कर दिया।
दवा कहां बनती थी? इस राज तक पहुंचने में जुटी पुलिस
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दवा बनवाने और उसकी पैकिंग का काम रऊफ और रिजवान देखते थे। दोनों पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मरीजों को भेजी जा रही ये दवाएं आखिर बन कहां रही थीं, इनके अंदर क्या था और अब तक कितने लोगों को बेची जा चुकी हैं। पुलिस दोनों फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। उनके पकड़े जाने के बाद दवा बनाने और सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क की और परतें खुल सकती हैं।
तीन पकड़े गए, दो अभी फरार
पुलिस ने साजिद मलिक, इस्लाम और मो. जफर को गिरफ्तार किया है। रऊफ और रिजवान मियां फरार हैं। पांचों के खिलाफ बारादरी थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कार्रवाई बारादरी थाना प्रभारी बिजेंद्र सिंह की टीम ने की। पुलिस अब बरामद मोबाइल, लैपटॉप और वेबसाइट के डेटा को खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने लोगों तक दवाएं भेजी गईं।