UP NEWSरुहेलखंड विश्वविद्यालय में करियर काउंसलिंग सत्र के दौरान शिक्षक और विद्यार्थी।

बरेली। मनोविज्ञान की पढ़ाई के बाद करियर सिर्फ शिक्षण और काउंसलिंग तक सीमित नहीं है। अस्पतालों, खेल, कॉरपोरेट और शोध सहित कई क्षेत्रों में अवसर हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित करियर काउंसलिंग सत्र में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को इन संभावनाओं से परिचित कराया।

रुचि और क्षमता के आधार पर चुनें करियर

कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, प्रशासन और सामाजिक विकास में मनोविज्ञान की भूमिका बढ़ रही है। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में बेहतर अवसरों के लिए शिक्षण के साथ प्रयोगात्मक कार्य, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी के लिए एक ही करियर विकल्प उपयुक्त नहीं हो सकता। किसी क्षेत्र में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर अपनी रुचि, क्षमता और कौशल के अनुरूप दूसरे विकल्प भी तलाशने चाहिए। करियर काउंसलिंग विद्यार्थियों को अपनी संभावनाएं पहचानने और सही निर्णय लेने में मदद करती है।

क्लिनिकल साइकोलॉजी से मानव संसाधन तक अवसर

विषय विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार ने क्लिनिकल, काउंसलिंग, स्कूल, औद्योगिक एवं संगठनात्मक मनोविज्ञान में करियर की जानकारी दी। उन्होंने स्वास्थ्य, खेल, फॉरेंसिक, न्यूरोसाइकोलॉजी, पुनर्वास तथा बाल एवं किशोर मनोविज्ञान से जुड़े विकल्प भी बताए। विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यताओं और कौशल से अवगत कराया गया। उच्च शिक्षा, नेट-जेआरएफ, पीएचडी, शिक्षण और शोध के साथ सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों, अस्पतालों, विद्यालयों तथा कॉरपोरेट क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। डॉ. दीपक कुमार ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए।

मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी

डॉ. ज्योति पाण्डेय ने विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक परीक्षणों, साइकोमेट्रिक उपकरणों और व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ परीक्षणों और उपकरणों के वैज्ञानिक एवं नैतिक प्रयोग का ज्ञान भी जरूरी है। विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में कुलसचिव महेंद्र कुमार सिंह, सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय, अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान विभाग के डॉ. दीपक कुमार, डॉ. अनुज और डॉ. संतोष सिंह का सहयोग रहा। सत्र में आरती गुप्ता, यश शुक्ला, दिव्यांश सारस्वत, नाजिश, अंजली गौतम, अंजलि राठौर, अनुराग, दिव्या तिवारी, खुशी, सहदेव, पूजा, स्वालहा और सिंधु राघव सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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