UP NEWSएसपी जयप्रकाश सिंह और आईपीएस दीपक भूकर।

लखनऊ/उन्नाव। कभी जिनके नाम से लोग डरते थे, आज वही अपराध की राह पर बढ़ रहे युवाओं को रोक रहे हैं। अपनी बर्बादी और परिवार का दर्द सुनाकर उन्हें नई जिंदगी की सीख दे रहे हैं। तत्कालीन एसपी आईपीएस दीपक भूकर की पहल से जिले के 176 हिस्ट्रीशीटरों पर दो साल से कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

दीपक भूकर ने शुरू किया ऑपरेशन दस्तक

सितंबर 2024 में उन्नाव के एसपी का कार्यभार संभालने के बाद आईपीएस दीपक भूकर ने हिस्ट्रीशीटरों को अपराध से दूर करने के लिए ऑपरेशन दस्तक शुरू किया। उनकी पहल में उन लोगों के अनुभवों को जगह दी गई, जो अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जीने लगे थे। दीपक भूकर ने ऐसे 52 हिस्ट्रीशीटरों का समूह तैयार किया। थानेवार तय तारीख पर इन्हें बुलाया जाता था। इनके सामने एक बार में 15 से 20 ऐसे हिस्ट्रीशीटर और युवाओं को बैठाया जाता, जो आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय थे। पुलिस की निगरानी में होने वाले संवाद में अपराध छोड़ चुके लोग बताते कि जेल, मुकदमों और बदनामी ने उनकी जिंदगी को कैसे प्रभावित किया।

अपराध से दूर रहने की सीख दे रहे यदुवीर, बसंत और रामगोपाल।

हमने जो गलती की, आप मत करना

इन बैठकों में अपराध छोड़ चुके लोग अपने अतीत का दर्द साझा करते हैं। वे बताते हैं कि अपराध का नुकसान केवल जेल जाने वाले को नहीं होता, उसका परिवार भी मुश्किलें झेलता है। रोजी-रोटी, रिश्ते और सामाजिक प्रतिष्ठा पर इसका असर पड़ता है। अपने अनुभवों से वे युवाओं को समझाते हैं कि शुरुआत में दबंगई और रसूख का आकर्षण भले दिखे, लेकिन आगे चलकर यही रास्ता जिंदगी को बर्बादी की ओर ले जाता है। उनकी सीख है—हमने अपने फैसलों की कीमत चुकाई, आप वही गलती मत दोहराइए।

रामगोपाल की सीख से 23 युवाओं ने बदली राह

सफीपुर क्षेत्र के रामगोपाल का अतीत भी अपराध से जुड़ा रहा है। वर्ष 1990 में डकैती और 1994 में हत्या के मामलों में जेल जाने के बाद उन्होंने अपराध से नाता तोड़ने का फैसला किया। अब वह खेती और सब्जी बेचकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। पुलिस की मुहिम से जुड़कर उन्होंने दूसरों को भी अपने अनुभव बताए। उनकी सीख से 23 युवाओं ने अपराध छोड़कर अपना काम शुरू किया।

बसंत ने 13 युवाओं को अपराध से बाहर निकाला

गंगाघाट क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर बसंत पर करीब 12 मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2000 में उनकी हिस्ट्रीशीट खुली थी। जेल जाने और परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के बाद उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव किया। करीब 25 वर्षों से उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। पुलिस की मुहिम से जुड़ने के बाद बसंत ने 13 युवाओं को अपराध से दूर करने में मदद की। ये युवा अब नौकरी या अपना रोजगार कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में इनके खिलाफ एनसीआर तक दर्ज नहीं हुई है।

यदुवीर ने खेती और सामाजिक कार्यक्रमों से जोड़ा जीवन

मोहान निवासी 35 वर्षीय यदुवीर दोस्तों की संगत में अपराध की राह पर चले गए थे। वर्ष 2017 में लूट के मुकदमे में जेल गए। आपराधिक गतिविधियां बढ़ने पर पुलिस ने उनकी हिस्ट्रीशीट खोल दी। थाने में आयोजित चौपाल में अपराध छोड़ चुके लोगों की बातें सुनकर यदुवीर ने भी अपना रास्ता बदलने का निर्णय लिया। अब वह खेती करते हैं और गणपति उत्सव समेत सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। उनके खिलाफ पिछले दो साल में कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

176 हिस्ट्रीशीटरों पर दो साल से नया मुकदमा नहीं

ऑपरेशन दस्तक से जुड़े संवाद और निगरानी के बीच जिले के 176 हिस्ट्रीशीटरों ने अपराध से दूरी बनाई है। पिछले दो वर्षों में इनके खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। अपराध छोड़ चुके लोगों में कोई खेती कर रहा है तो कोई दुकान या दूसरे रोजगार से परिवार चला रहा है। तत्कालीन एसपी दीपक भूकर की शुरू की गई इस पहल को एसपी जयप्रकाश सिंह आगे बढ़ा रहे हैं।

कार्रवाई के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

एसपी जयप्रकाश सिंह का कहना है कि अपराध छोड़ चुके लोगों के अनुभव भटक रहे युवाओं को सही रास्ता दिखाने में मदद कर रहे हैं। पुलिस का उद्देश्य अपराधियों पर कार्रवाई करने के साथ अपराध से दूर हो चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। अपने अतीत की गलतियों से सीख लेने वाले लोगों को दूसरों को भी अपराध से बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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