बरेली। शहर के दो बड़े प्रोजेक्ट वन विभाग की अनापत्ति के फेर में फंस गए हैं। एक तरफ राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत मिनी बाइपास से झुमका तिराहे तक करीब आठ किलोमीटर सड़क के दोनों ओर सात करोड़ रुपये की लागत से टाइल्स लगाने का काम करीब दो साल से अटका है। दूसरी ओर परसाखेड़ा में ₹16.61 करोड़ से नया संभागीय परिवहन कार्यालय बनकर तैयार है, लेकिन रास्ते में आ रहे पेड़ों को हटाने की अनुमति नहीं मिलने से विभाग पुराने किराये के भवन से निकल नहीं पा रहा है।

सात करोड़ मंजूर, टेंडर हुआ… फिर वन विभाग ने रुकवा दिया काम

NCAP के तहत मिनी बाइपास से झुमका तिराहे तक सड़क के दोनों तरफ टाइल्स लगाई जानी हैं। पीडब्ल्यूडी ने अक्टूबर 2024 में टेंडर के जरिये कन्नौज की नाथ जी कंस्ट्रक्शन को काम सौंपा था। फर्म ने सड़क किनारे पत्थर डालकर काम शुरू किया, लेकिन संबंधित जमीन फॉरेस्ट रिजर्व क्षेत्र में होने के कारण वन विभाग ने काम रुकवा दिया। वन विभाग ने इसके बदले करीब 2.2 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने की शर्त रखी। पहले नवाबगंज में जमीन चिह्नित की गई, लेकिन मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण वन विभाग ने उसे स्वीकार नहीं किया। बाद में आंवला क्षेत्र के बछेड़ा गांव में मानक के मुताबिक जमीन उपलब्ध कराकर वन विभाग को हैंडओवर कर दी गई।

जमीन भी दे दी, फिर भी फाइल को NOC का इंतजार

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक करीब डेढ़ माह पहले भूमि वन विभाग को सौंपी जा चुकी है। अब कभी नक्शा तो कभी लेखपाल की रिपोर्ट जैसी औपचारिकताओं के चलते अनापत्ति प्रमाणपत्र का इंतजार बना हुआ है। अनुमति मिलते ही पुराने ठेकेदार से पुरानी दरों पर काम शुरू कराने की तैयारी है। ठेकेदार भी इसी दर पर काम करने के लिए सहमत बताया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता भगत सिंह के मुताबिक भूमि वन विभाग को हैंडओवर की जा चुकी है और अब NOC का इंतजार है। वहीं मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह का कहना है कि मामला डीएफओ स्तर का है। फाइल जहां भी लंबित है, उसे दिखवाकर काम जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।

बिना अनुमति JCB उतारी तो लगा था एक लाख का जुर्माना

काम की शुरुआत में अनुमति लिए बिना मशीनरी उतारना ठेकेदार को भारी पड़ा था। वन विभाग ने JCB सीज कर फर्म पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। ठेकेदार की FDR भी करीब दो साल तक लोक निर्माण विभाग में जब्त रही। अब तमाम प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना एक बार फिर वन विभाग की अंतिम मंजूरी पर टिकी है।

RTO ऑफिस तैयार, पेड़ों ने रोक रखी शिफ्टिंग

बरेली। वन विभाग की NOC का इंतजार केवल सड़क परियोजना को ही नहीं है। परसाखेड़ा में करीब ₹16.61 करोड़ की लागत से तैयार नया संभागीय परिवहन कार्यालय भी इसी पेच में फंसा है। भवन तैयार है, मुख्य मार्ग से कार्यालय तक सड़क भी बन चुकी है, मगर रास्ते में आ रहे कई पेड़ों को हटाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यालय की शिफ्टिंग नहीं हो पा रही है।

फिलहाल आरटीओ कार्यालय शाहजहांपुर रोड स्थित नकटिया में किराये के पुराने भवन में संचालित हो रहा है। यहां रिकॉर्ड रूम से लेकर अधिकारियों-कर्मचारियों के बैठने तक के लिए पर्याप्त जगह की समस्या है। करीब चार साल पहले नए कार्यालय को मंजूरी मिली थी। परसाखेड़ा में लगभग 3,000 वर्ग फीट भूमि पर सीएंडडीएस जल निगम ने दो मंजिला भवन तैयार किया है।

अग्निशमन और विद्युत विभाग की NOC मिल चुकी है। वन विभाग की फाइल मुख्यालय भेजी गई है और वहां से अनुमति मिलने के बाद अंतिम NOC जारी होने की उम्मीद है। आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह के मुताबिक प्रक्रिया पूरी होते ही कार्यालय को नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि सितंबर से नए भवन में कामकाज शुरू हो सकता है।

नया दफ्तर खुला तो दलालों पर भी कसेगा शिकंजा

नए भवन में आरटीओ कार्यालय शिफ्ट होने का असर बाहर सक्रिय दलालों पर भी पड़ सकता है। नई जगह पर विभागीय व्यवस्था के साथ प्रशासन और पुलिस की निगरानी कड़ी रखने की तैयारी है। ऐसे में कार्यालय परिसर के आसपास अनधिकृत रूप से सक्रिय लोगों के लिए पुराने ढर्रे पर काम करना आसान नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *