बरेली। आईजीआरएस पर शिकायत को निस्तारित दिखाकर फाइल बंद करना जिले के सात अधिकारियों को भारी पड़ गया। कागजों में शिकायतें निपट गईं, लेकिन फरियादी समाधान से संतुष्ट नहीं हुए। अगस्त की फीडबैक रिपोर्ट में सात अधिकारियों का संतुष्टि प्रतिशत शून्य मिलने पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। इन अधिकारियों के वेतन आहरण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।
सात अफसरों के खाते में एक भी संतुष्ट फीडबैक नहीं
एक अगस्त से एक सितंबर तक प्राप्त फीडबैक की समीक्षा में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। अधिशासी अभियंता बाढ़ कार्य मंडल सिंचाई एवं जल संसाधन, जिला उपायुक्त मनरेगा, जिला क्षय रोग अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी शेरगढ़, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी दमखोदा, प्राचार्य डायट और सब रजिस्ट्रार फरीदपुर से जुड़े मामलों में संतुष्टि का आंकड़ा शून्य रहा। रिपोर्ट के अनुसार इन सभी अधिकारियों से संबंधित एक-एक फीडबैक मिला और सातों में शिकायतकर्ता असंतुष्ट रहे। यानी संबंधित मामलों में एक भी फरियादी ने निस्तारण पर संतोष नहीं जताया।
पोर्टल पर निस्तारित लिखना काफी नहीं, समाधान भी दिखना चाहिए
फीडबैक रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि आईजीआरएस पर केवल जवाब लगाकर शिकायत बंद करने की कार्यशैली नहीं चलेगी। शिकायत का निस्तारण ऐसा होना चाहिए जिससे फरियादी को वास्तविक राहत मिले। अधिकारियों को शिकायतों की गंभीरता समझकर मौके और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है।
अब फीडबैक पर रहेगी नजर, लापरवाही मिली तो कार्रवाई
आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण के साथ अब फरियादियों के फीडबैक की भी लगातार समीक्षा होगी। खराब निस्तारण और बार-बार असंतोष सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल शून्य संतुष्टि वाले सात अधिकारियों की सैलरी रोककर प्रशासन ने संदेश दे दिया है कि जनशिकायतों के निस्तारण में खानापूर्ति अब भारी पड़ सकती है।