राजश्री मेडिकल कॉलेज

बरेली। आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की व्यवस्था को धता बताते हुए मरीज के परिजनों से कथित अवैध वसूली करने के मामले में राजश्री मेडिकल कॉलेज घिर गया है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद कार्यदायी संस्था ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए परिजनों से लिए गए रुपये वापस करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोबारा ऐसी शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मौत के बाद खुली वसूली की परतें

उत्तराखंड निवासी सायरा को 7 मई को उपचार के लिए राजश्री मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। मरीज आयुष्मान कार्ड धारक थी और उसके उपचार के लिए योजना के तहत 48 हजार रुपये का प्री-अप्रूवल भी जारी हो चुका था। हालांकि स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो सका और 12 मई को उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल में उनसे नकद रुपये वसूले गए, लेकिन कोई रसीद नहीं दी गई। परिजनों ने वसूली का वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में जांच का अहम आधार बना।

वीडियो साक्ष्य के सामने नहीं टिक सका दावा

शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई गई। जांच समिति के समक्ष राजश्री मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने दावा किया कि मरीज के परिजनों से कोई धनराशि नहीं ली गई और आयुष्मान योजना के तहत मिले 48 हजार रुपये भी वापस कर दिए गए हैं। लेकिन वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों ने अस्पताल के दावे की पोल खोल दी। जांच रिपोर्ट में वसूली की पुष्टि होने के बाद कार्यदायी संस्था की राज्य शिकायत अधिकारी वंदिता सिंह के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को चेतावनी पत्र जारी किया गया। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए कि मरीज के तीमारदारों से ली गई रकम तत्काल वापस की जाए।

अब दोबारा गलती पर होगी सख्त कार्रवाई

कार्यदायी संस्था ने साफ किया है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों से किसी भी प्रकार की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में इस तरह की शिकायत दोबारा सामने आई तो राजश्री मेडिकल कॉलेज के खिलाफ और अधिक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। आयुष्मान योजना के नाम पर वसूली के इस मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।

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