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बरेली। दहेज हत्या के आरोप में पिछले चार माह से बरेली जेल में बंद रईस उर्फ रहीस उर्फ जहूर अहमद उर्फ नन्हे अंसारी को शनिवार को एक अन्य चर्चित दोहरे हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट के फैसले के बाद उसे मुजफ्फरनगर जेल भेज दिया गया। वहीं, उसकी पत्नी सीता की संदिग्ध मौत के मामले में दहेज हत्या का मुकदमा अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।

बिशारतगंज थाना क्षेत्र के गांव परावहाउद्दीनपुर निवासी रईस 24 जनवरी 2026 से जेल में बंद था। उसकी पत्नी सीता का शव 21 जनवरी को घर में फंदे से लटका मिला था। घटना के बाद सीता के भाई मुकेश ने रईस के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।

इटावा जेल में हुई थी मुलाकात, फिर की थी शादी

पुलिस जांच के अनुसार रईस टंकी निर्माण का काम करता था। करीब दो वर्ष पहले वह इटावा जेल में निर्माण कार्य के दौरान राजस्थान के भरतपुर निवासी सीता के संपर्क में आया था। उस समय सीता भी जेल में बंद थी। जेल से रिहा होने के बाद दोनों ने करीब डेढ़ वर्ष पहले विवाह कर लिया था।

दहेज प्रताड़ना के आरोप, भाई ने दर्ज कराई रिपोर्ट

सीता के भाई मुकेश का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही रईस दहेज की मांग को लेकर सीता को प्रताड़ित करने लगा था। वह उसे मायके भी नहीं जाने देता था। सीता की मौत के बाद मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर चार अप्रैल को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।

अब मुजफ्फरनगर जेल में रहेगा आरोपी

शनिवार को मां-बेटे की हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने रईस को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। फैसले से पहले उसे बरेली जेल से मुजफ्फरनगर ले जाया गया था। सजा सुनाए जाने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में मुजफ्फरनगर जेल भेज दिया गया।

हाईकोर्ट में अपील को लेकर उठे सवाल

फांसी की सजा मिलने के बाद अब आरोपी के सामने हाईकोर्ट में अपील का विकल्प है, लेकिन परिवार की ओर से अब तक कोई सक्रियता नहीं दिखाई गई है। ऐसे में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि दहेज हत्या समेत अन्य मामलों में घिरे रईस की कानूनी लड़ाई आगे कौन लड़ेगा।

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