बरेली। फर्जी फर्मों और बोगस बिलिंग के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की कथित GST और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) चोरी की जांच अब उन फर्मों तक पहुंच गई है, जिन्हें इस नेटवर्क का अंतिम लाभार्थी बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक जांच में सोबती इंफ्रा और सोबती इंफ्राटेक समेत कई फर्मों के नाम ‘लास्ट बेनिफिशियरी’ के रूप में सामने आए हैं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अब संबंधित फर्मों के मालिकों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच के साथ गिरफ्तारी की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
फर्जी फर्मों की चेन से असली कंपनियों तक पहुंचती थी ITC
पुलिस जांच के मुताबिक पूरा नेटवर्क कागजों पर फर्में खड़ी कर उनके जरिए फर्जी बिलिंग और बोगस ITC ट्रांसफर करने के तरीके पर काम कर रहा था। कई स्तरों से गुजरने के बाद टैक्स क्रेडिट कथित तौर पर वास्तविक कारोबार करने वाली लाभार्थी फर्मों तक पहुंचाया जाता था। SIT का दावा है कि इसी नेटवर्क के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। अब जांच का फोकस फर्जी फर्म बनाने और बिल उपलब्ध कराने वालों से आगे बढ़कर कथित लाभार्थियों तक पहुंच गया है।
सोबती इंफ्रा और सोबती इंफ्राटेक समेत कई फर्में जांच के घेरे में
पुलिस के अनुसार कथित लास्ट बेनिफिशियरी फर्मों की सूची में एनडी रेलवे एमएस रोड, सोबती इंफ्रा, सोबती इंफ्राटेक, पावर एंड कंस्ट्रक्शन, यसी इंटरप्राइजेज, पेंटा स्टार, मीना गुप्ता, श्री नाथजी इंटरप्राइजेज, नाइट स्टार और आर्ट लाइफ समेत करीब 17 फर्मों के नाम जांच में सामने आए हैं। SIT अब इनके लेनदेन, बिलिंग और प्राप्त ITC से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में आपराधिक भूमिका के साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नेपाल में ‘संदीप’ बनकर छिपे फुरकान से खुली सिंडिकेट की परतें
इस बड़े नेटवर्क की कई परतें फुरकान हाशमी की गिरफ्तारी के बाद खुलीं। पुलिस के मुताबिक किला के बड़ा बाजार निवासी फुरकान मुकदमा दर्ज होने के बाद नेपाल चला गया था। वहां वह ‘संदीप’ के फर्जी नाम से रह रहा था और एक ऐप के जरिए अपने साथियों को कथित तौर पर फर्जी बिल उपलब्ध करा रहा था। फुरकान से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस नेटवर्क की दूसरी कड़ियों तक पहुंची।
सागर अग्रवाल को बताया सिंडिकेट की अहम कड़ी
पुलिस जांच में इज्जतनगर के कर्मचारी नगर निवासी सागर अग्रवाल का नाम भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक सागर फर्जी फर्में उपलब्ध कराने और उनसे वास्तविक कंपनियों के बीच बोगस ITC ट्रांसफर कराने की महत्वपूर्ण कड़ी था। पूछताछ में कुतुबखाना निवासी विनीत अरोड़ा, खैरुल्ला गली निवासी अनुज अग्रवाल और नीम की चढ़ाई निवासी शिवम उर्फ लाला समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। पुलिस सागर अग्रवाल, विनीत अरोड़ा, अनुज अग्रवाल और शिवम उर्फ लाला को गिरफ्तार कर चुकी है।
अब तक सात जेल भेजे, छह की तलाश जारी
इस मामले में पुलिस अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इससे पहले सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद फुरकान और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों पर कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक सैय्यद सैफ, शाजिज, आसिफ, तौसिफ, फिरोज और फम्मी उर्फ फराज अभी फरार हैं। SIT उनकी तलाश कर रही है।
पुराने लेनदेन भी खंगाल रही SIT
जांच का दायरा अब पुराने वित्तीय लेनदेन तक बढ़ाया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक कुछ फर्मों की पूर्व में हुई बिलिंग और GST जांच का रिकॉर्ड भी देखा जा रहा है। पेंटा स्टार फर्म के वर्ष 2021-22 और 2022-23 के करीब सवा करोड़ रुपये की कथित फर्जी बिलिंग से जुड़े प्रकरण की भी पड़ताल की जा रही है। इस मामले में पूर्व में सेंट्रल GST स्तर पर जांच और ITC ब्लॉक किए जाने की बात सामने आई है।
करीबियों और पेशेवर मददगारों की भूमिका भी जांच के दायरे में
SIT अब यह भी पता लगा रही है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जी फर्मों, बिलिंग और ITC ट्रांसफर के नेटवर्क को संचालित करने में किन लोगों ने तकनीकी या पेशेवर मदद उपलब्ध कराई। जांच में शहर के कुछ पेशेवर लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पिछले वर्ष GST अधिकारियों की ओर से किला थाने में फर्जी फर्मों के माध्यम से टैक्स चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसएसपी अनुराग आर्य ने जांच SIT को सौंपी थी। अब जांच कथित ‘लास्ट बेनिफिशियरी’ तक पहुंचने के बाद इस मामले में कार्रवाई का दायरा और बढ़ने की संभावना है।