उन्नाव। करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क लोकार्पण के महज 17वें दिन से ही जवाब देने लगी और अब हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार तक 46 स्थानों पर धंस चुकी सड़क शुक्रवार को सात और जगह बैठ गई। इसके साथ ही धंसने वाले स्थानों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। स्थिति यह है कि जहां पहले पैचवर्क कर सड़क दुरुस्त की गई, उसके आसपास भी नई दरारें और धंसाव सामने आ रहे हैं। आजाद मार्ग से बनी टोल तक 28 अन्य स्थानों पर जर्क मिलने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल और गहरा गए हैं।
63 किमी की सड़क, हर किलोमीटर पर करीब 66 करोड़ का खर्च
कानपुर से लखनऊ तक करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यानी औसतन प्रत्येक किलोमीटर सड़क पर करीब 66 करोड़ रुपये की लागत आई। निर्माण के दौरान एनएचएआई और कार्यदायी संस्था की ओर से बेहतर सफर और 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निर्बाध यातायात के दावे किए गए थे, लेकिन लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद शुरू हुए धंसाव ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक जगह मरम्मत पूरी, दूसरी जगह फिर बैठ गई सड़क
बेहटा के पास किलोमीटर संख्या 64 पर धंसी करीब 200 मीटर सड़क की मरम्मत छठे दिन पूरी कर ली गई, लेकिन अभी यहां यातायात शुरू नहीं किया गया है। भारी वाहनों के आवागमन पर लगातार दूसरे दिन रोक जारी रही। इसी क्षेत्र में किलोमीटर संख्या 64.4 पर करीब 10 मीटर और 65.1 पर 15 मीटर सड़क फिर धंस गई। मंगतखेड़ा के पास किलोमीटर संख्या 46.8 से 47 के बीच करीब 15 मीटर और कांथा गांव के पास किलोमीटर संख्या 39.7 पर लगभग 50 मीटर सड़क बैठने का मामला सामने आया है। बेगमखेड़ा के पास किलोमीटर संख्या 30.7 पर पहले करीब 10 मीटर सड़क धंसी थी। करौंदी गांव के पास किलोमीटर संख्या 68.8 पर किया गया करीब 20 मीटर पैचवर्क भी उखड़ गया। सहरावां के पास किलोमीटर संख्या 31 पर करीब आठ मीटर सड़क धंसने के बाद खोदाई कर नए सिरे से मरम्मत कराई जा रही है।
नए पीडी ने संभाला मोर्चा, तीन घंटे तक एक्सप्रेसवे पर जांच
लगातार सामने आ रहे धंसाव के बीच एनएचएआई के नवागत परियोजना निदेशक नवरतन कुमार शुक्रवार सुबह करीब दस बजे एक्सप्रेसवे पहुंचे। उन्होंने ग्रीन फील्ड क्षेत्र में करीब 45 किलोमीटर हिस्से का निरीक्षण किया और लगभग तीन घंटे तक मौके पर रहकर सड़क की स्थिति देखी। इस दौरान उन्होंने जांच कर रही एनआईटी की टीम से भी बातचीत की। प्रथम दृष्टया सड़क की ऊपरी परत में दरार पड़ने और उसके भीतर बारिश का पानी पहुंचने को धंसाव की संभावित वजहों में माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक कारण तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
18 जगह से मिट्टी, सड़क और कंक्रीट के सैंपल
एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए एनआईटी की टीम ने अलग-अलग 18 स्थानों से सड़क, मिट्टी और कंक्रीट के नमूने लिए हैं। इनकी तकनीकी जांच के आधार पर पता लगाया जाएगा कि बार-बार सड़क बैठने के पीछे निर्माण सामग्री, डिजाइन, जल निकासी या कोई दूसरी तकनीकी खामी जिम्मेदार है। लगातार नई जगहों पर सड़क धंसने से यात्रियों की परेशानी भी बढ़ रही है। मरम्मत और बैरिकेडिंग के कारण कई हिस्सों में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
अखिलेश का हमला—‘भ्रष्टाचार का नमूना है एक्सप्रेसवे’
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे की हालत को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि करीब 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की लागत चार हजार करोड़ रुपये से अधिक है और निर्माण के बाद ही सड़क का जगह-जगह धंसना भ्रष्टाचार का नमूना है। उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की लागत का भी जिक्र करते हुए निर्माण खर्च पर सवाल उठाए और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से इसकी तुलना की।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
लगातार धंस रही सड़क के बीच सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर है। एक तरफ एनएचएआई क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करा रहा है, दूसरी तरफ एनआईटी की तकनीकी टीम सड़क की परतों से लेकर मिट्टी और कंक्रीट तक की जांच में जुटी है। अब निगाहें सैंपलों की जांच रिपोर्ट पर हैं, जिससे साफ होगा कि हजारों करोड़ रुपये के इस एक्सप्रेसवे पर बार-बार सामने आ रहे धंसाव की असली वजह क्या है।इस खबर की सबसे मजबूत वेब हेडिंग मेरे हिसाब से होगी: “4200 करोड़ का एक्सप्रेसवे 17 दिन में ‘बीमार’, 53 जगह धंसी सड़क; पैचवर्क के बगल में फिर दरार”।