UP NEWSबरेली कॉलेज, बरेली

बरेली। देखरेख में लापरवाही के चलते बरेली कॉलेज के इतिहास से जुड़ी एक बेशकीमती धरोहर का पता नहीं चल रहा है। वर्ष 1905 में कॉलेज की तत्कालीन प्रबंध समिति की ओर से गवर्नर को भेंट किया गया सोने का स्मृति चिह्न करीब एक सदी बाद ऑस्ट्रेलिया से बरेली लौटा था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले वॉन दंपती ने दिसंबर 2004 में इसे कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया था। अब कॉलेज में इस मूल स्मृति चिह्न की कोई जानकारी नहीं मिल रही है। हालांकि उससे जुड़ा स्वर्णिम दस्तावेज ऑस्ट्रेलिया से वापस आया है, जिससे 121 साल पुराना इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

18 जुलाई 1905 की तारीख, कॉलेज के इतिहास से जुड़ी कहानी

स्मृति चिह्न की रेप्लिका पर 18 जुलाई 1905 की तारीख अंकित है। इससे उस दौर के बरेली कॉलेज और शहर के इतिहास की कई जानकारियां सामने आती हैं। उस समय कॉलेज के विकास और विस्तार में सहयोग करने वालों के प्रति आभार जताने के लिए तत्कालीन प्रबंध समिति की ओर से स्मृति चिह्न भेंट किए जाते थे। रिकॉर्ड के अनुसार रामपुर नवाब की ओर से शहर के बीच करीब 36 एकड़ भूमि दान करने, बिलारी के राजा किशन कुमार और लखीमपुर खीरी के राय बहादुर राय को कॉलेज के लिए आर्थिक सहयोग देने पर प्रबंध समिति ने धन्यवाद दिया था। कॉलेज के मुख्य द्वार पर आज भी राय बहादुर राय का नाम दर्ज बताया जाता है।

सिडनी में वॉन दंपती के पास पहुंची थी धरोहर

जानकारी के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाले वॉन दंपती ने वहां एक एंटीक चीजों की दुकान से यह स्मृति चिह्न खरीदा था। इसके महत्व को समझने के बाद उन्होंने इसे अपने पास सुरक्षित रखा। इतिहास और विरासत के प्रति लगाव के कारण उन्होंने इससे जुड़ी जानकारियां भी जुटाईं।
बरेली कॉलेज की मौजूदा इमारत के 100 वर्ष पूरे होने से पहले दिसंबर 2004 में वॉन दंपती बरेली आए। कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सोने का मूल स्मृति चिह्न कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया। उस समय कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस ऐतिहासिक धरोहर की वापसी को खास माना था।

कॉलेज में अब नहीं मिल रहा मूल स्मृति चिह्न

करीब 22 साल पहले कॉलेज को सौंपे गए इस स्मृति चिह्न का अब पता नहीं चल रहा है। कॉलेज से जुड़े पुराने लोगों से जानकारी जुटाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इसे कहां सुरक्षित रखा गया था और वर्तमान में यह कहां है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओपी राय का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी स्मृति चिह्न की जानकारी नहीं है। पुराने लोगों से भी इस संबंध में जानकारी जुटाई गई, लेकिन कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि यदि स्मृति चिह्न गायब हुआ है तो इसकी जांच कराकर पता लगाने का प्रयास किया जाएगा।

किताब में रेप्लिका, लेकिन असली निशानी का सुराग नहीं

वरिष्ठ लेखक सुधीर विद्यार्थी ने इससे जुड़ी जानकारी अपनी पुस्तक बरेली एक कोलाज में भी दर्ज की थी। उनके पास स्मृति चिह्न की रेप्लिका मौजूद है, लेकिन मूल स्मृति चिह्न कहां गया, इसका जवाब अब भी नहीं मिल सका है। उनके मुताबिक वर्ष 2015 में पुस्तक के प्रकाशन से पहले उन्होंने स्मृति चिह्न को दोबारा देखने के लिए कॉलेज से संपर्क किया था। उस समय भी इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद कई लोगों से संपर्क किया गया, लेकिन मूल स्मृति चिह्न का कोई सुराग नहीं लगा।

2004 के कार्यक्रम के गवाह भी उठा रहे सवाल

वर्ष 2004 में वॉन दंपती के हाथों स्मृति चिह्न कॉलेज प्रशासन को सौंपे जाने के कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि यह आयोजन कॉलेज के सेमिनार हॉल में हुआ था। तत्कालीन लोगों को इसकी याद है, लेकिन अब स्मृति चिह्न कहां है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *