बरेली। 22 महीने में रकम दोगुनी करने का सपना दिखाया और रिटायर कर्मचारी से 10 लाख रुपये निवेश करा लिए। जब पैसा वापस लेने का वक्त आया तो कंपनी का दफ्तर ही बंद मिला। गंगा इंफ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के एमडी राजेश कुमार मौर्य पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बारादरी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पीड़ित ने एसएसपी अनुराग आर्य से शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी।
सक्षम प्राधिकारी नगर भूमि सीमारोपण कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी पीड़ित अमर सिंह वर्मा के मुताबिक राजेश कुमार मौर्य उनके कार्यालय में पहले से आते-जाते थे। 31 अगस्त 2017 को रिटायर होने के बाद मौर्य ने उनसे अपनी कंपनी में पैसा लगाने के लिए संपर्क किया। आरोप है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया कि महज 22 महीने में निवेश की रकम दोगुनी हो जाएगी। राजेश की बातों पर भरोसा करके अमर सिंह वर्मा ने 15 दिसंबर 2017 को गंगा इंफ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम 10 लाख रुपये का एसबीआई चेक दे दिया। शिकायत के मुताबिक 19 दिसंबर को पूरी रकम उनके खाते से कंपनी के खाते में ट्रांसफर हो गई। निवेश से जुड़े बैंक दस्तावेज भी पीड़ित ने पुलिस को सौंपे हैं।
रिटर्न का वक्त आया तो दफ्तर पर लटका मिला ताला
पैसा लगाने के कुछ महीने बाद जब अमर सिंह वर्मा 10 जुलाई 2018 को ग्रीन पार्क स्थित कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। कार्यालय पर ताला लटका था। आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि कंपनी अपना सामान समेटकर वहां से जा चुकी है। इसके बाद पीड़ित ने अपनी रकम वापस पाने के लिए काफी समय तक इंतजार किया। रकम वापस न मिलने पर अमर सिंह वर्मा ने 7 अगस्त 2026 को एसएसपी अनुराग आर्य से शिकायत की। उन्होंने कंपनी के एमडी राजेश कुमार मौर्य और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी 10 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई।
एसएसपी के आदेश पर बारादरी पुलिस ने दर्ज किया केस
एसएसपी के आदेश के बाद बारादरी पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब कंपनी के बैंक खातों, निवेश से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की पड़ताल कर रही है। साथ ही कंपनी से जुड़े अन्य लोगों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। शिकायत में गंगा इंफ्रासिटी पर बड़े पैमाने पर लोगों से निवेश कराने के आरोप लगाए गए हैं। मामले को करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी से जोड़कर भी चर्चा हो रही है, हालांकि इस रकम और पीड़ितों की वास्तविक संख्या की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। अब पुलिस की जांच से सामने आएगा कि कंपनी ने कितने लोगों से पैसा लिया और रकम कहां-कहां इस्तेमाल की गई।