up newsएसएसपी अनुराग आर्य

बरेली। उत्तर प्रदेश में एफआईआर दर्ज करने के मामले में बरेली लगातार सबसे आगे बना हुआ है। पुलिस चौकी से लेकर एसएसपी कार्यालय तक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान होने का असर एफआईआर के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। पब्लिक का बरेली पुलिस पर भरोसा बढ़ने के साथ ही जनसुनवाई का असर भी जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है।

हालांकि इसके साथ ही झूठे और बेबुनियाद मुकदमों की संख्या भी बढ़ी है, जिसके चलते बड़ी संख्या में मामलों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) और एक्सपंज की कार्रवाई करनी पड़ी है। वर्ष 2025 और 2026 के अब तक के समय में बरेली में कुल 28,090 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें वर्ष 2025 में 19,585 और वर्ष 2026 में अब तक 8,505 मुकदमे दर्ज किए गए। दोनों वर्षों में बरेली प्रदेश में एफआईआर दर्ज करने के मामले में पहले स्थान पर रहा।

बरेली के बाद गोरखपुर और अलीगढ़ में हुई सबसे ज्यादा एफआईआर

वर्ष 2025 में बरेली के बाद गोरखपुर (16,731) दूसरे और अलीगढ़ (15,776) तीसरे स्थान पर रहा। वहीं वर्ष 2026 में अब तक अलीगढ़ (6,969) दूसरे और बुलंदशहर (6,897) तीसरे स्थान पर हैं।

6,602 मामलों में एफआर और एक्सपंज की कार्रवाई

एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान होने से झूठे मुकदमों का ग्राफ भी बढ़ा है। पिछले डेढ़ वर्ष में 6,602 मामलों में जांच के बाद या तो फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाई गई या मुकदमे एक्सपंज किए गए। वर्ष 2025 में 4,737 मामलों में एफआर और 82 मुकदमे एक्सपंज किए गए, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 1,739 मामलों में एफआर और 82 मुकदमे एक्सपंज किए जा चुके हैं।

इन वजहों से बढ़ी एफआईआर

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अब शिकायतकर्ता को चौकी, थाना, सीओ, अपर पुलिस अधीक्षक और एसएसपी स्तर तक आसानी से सुनवाई मिल रही है। इसके अलावा यूपी कॉप मोबाइल ऐप, पुलिस की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन एफआईआर, शून्य एफआईआर (Zero FIR) की सुविधा तथा अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर और अन्य विशेष अभियानों में दर्ज मुकदमों ने भी एफआईआर के आंकड़े बढ़ाए हैं।

एसएसपी बोले, अपराध नहीं, व्यवस्था हुई मजबूत

एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि जनसुनवाई को हर स्तर पर सुलभ बनाने के लगातार प्रयास किए गए हैं। इसी कारण एफआईआर दर्ज कराने में लोगों को आसानी हुई है। उन्होंने कहा कि एफआईआर की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि अपराध बढ़े हैं, बल्कि शिकायतों के त्वरित पंजीकरण और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के कारण आंकड़े बढ़े हैं। गैंगस्टर सहित विभिन्न कानूनी अभियानों ने भी एफआईआर की संख्या में वृद्धि की है।

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