Bareillyसील होने के बावजूद संचालित समीम हॉस्पिटल

बरेली। चार अगस्त को स्वास्थ्य विभाग ने जिस शमीम अस्पताल को सील कर दिया था, वह अब फिर से चलता नजर आ रहा है। अस्पताल खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि नोडल अधिकारी सुचिता गंगवार का कहना है कि उन्होंने अस्पताल खोलने का कोई आदेश नहीं दिया। वहीं अस्पताल मालिक अकीब का दावा है कि उनके पास अस्पताल का रजिस्ट्रेशन मौजूद है। ऐसे में अब सवाल है कि आखिर मामला क्या है और सील खुली तो किसके आदेश पर?

शमीम अस्पताल से बाहर निकलते लोग

4 अगस्त को अचानक पहुंची टीम और लगा दी सील

नैनीताल रोड, देवरनिया ऑन रोड स्थित शमीम अस्पताल पर चार अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी। नोडल अधिकारी सुचिता गंगवार की मौजूदगी में अस्पताल को सील किया गया था। उस समय स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया था कि अस्पताल के पास संचालन का रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसी आधार पर अस्पताल को बंद कराया गया था।

अब वही अस्पताल फिर खुला तो मचा हड़कंप

कुछ समय बाद अस्पताल के दोबारा संचालित होने की बात सामने आई तो मामला फिर गरमा गया। अगर अस्पताल सील था तो उसे खोला किसने? और अगर अस्पताल खोलने की अनुमति मिल गई थी तो उसका आदेश कहां है? यही सवाल अब स्वास्थ्य विभाग के सामने खड़ा है।

नोडल अधिकारी बोलीं- मैंने खोलने का आदेश नहीं दिया

नोडल अधिकारी सुचिता गंगवार ने साफ कहा कि उन्होंने शमीम अस्पताल को दोबारा खोलने का कोई आदेश नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल फिर से चल रहा है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। अब अधिकारी के इस बयान के बाद सीधा सवाल उठ रहा है, सील लगाने वाली अधिकारी ने नहीं खोला, तो फिर सील हटाई किसने।

अस्पताल मालिक अकीब बोला- हमारे पास रजिस्ट्रेशन है

दूसरी तरफ अस्पताल मालिक अकीब ने स्वास्थ्य विभाग के उस दावे से अलग बात कही है, जिसके आधार पर अस्पताल को सील किया गया था। अकीब का कहना है कि उनके पास अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है। अब रजिस्ट्रेशन को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज और उसकी वैधता की जांच से ही स्थिति साफ होगी।

अगर रजिस्ट्रेशन था तो अस्पताल सील क्यों हुआ?

अस्पताल मालिक के मुताबिक रजिस्ट्रेशन मौजूद है। ऐसे में सवाल उठता है कि चार अगस्त को स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को किस दस्तावेज या रिकॉर्ड के आधार पर बिना रजिस्ट्रेशन वाला माना? क्या उस समय रजिस्ट्रेशन उपलब्ध नहीं था? क्या बाद में रजिस्ट्रेशन दिखाया गया? या फिर रिकॉर्ड को लेकर कोई गलतफहमी हुई? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

और अगर सील खुली तो आदेश कहां है?

अब दूसरा बड़ा सवाल सील हटाने को लेकर है। नोडल अधिकारी कह रही हैं कि उन्होंने अस्पताल खोलने का आदेश नहीं दिया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को यह पता करना होगा कि सील कब हटाई गई और किसकी अनुमति से हटाई गई। अगर किसी सक्षम अधिकारी ने अनुमति दी थी तो उसका लिखित आदेश भी सामने आना चाहिए।

साठगांठ के आरोप ने बढ़ाया मामला

अस्पताल संचालक की किसी दूसरे नोडल अधिकारी से कथित साठगांठ कर सील खुलवाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इस आरोप की सच्चाई जांच के बाद ही साफ होगी। जांच में यह भी पता लगना चाहिए कि सील हटाने के समय कौन मौजूद था और अस्पताल दोबारा कब से चल रहा है।

अब विभाग के सामने दो बड़े सवाल

एक तरफ अस्पताल मालिक कह रहे हैं कि रजिस्ट्रेशन उनके पास है। दूसरी तरफ नोडल अधिकारी बता रही हैं कि उन्होंने अस्पताल खोलने का आदेश नहीं दिया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को दो बातें साफ करनी होंगी कि अस्पताल के रजिस्ट्रेशन की असली स्थिति क्या है और चार अगस्त को लगी सरकारी सील आखिर किसके आदेश पर खुली।

सील लगी थी या सिर्फ दिखावे की कार्रवाई हुई?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर अस्पताल को सील करने के बाद वह दोबारा चलने लगा तो विभाग की निगरानी कहां थी? सील की जांच किसने की? अस्पताल दोबारा खुलने की जानकारी विभाग को कब हुई। नोडल अधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेकर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। अब जांच में जो सामने आएगा, उसी से तय होगा कि गलती रजिस्ट्रेशन के मामले में हुई, सील लगाने में हुई या फिर सील हटाने में।

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