इस्लामाबाद/काबुल। अफगानिस्तान में लगातार सैन्य कार्रवाई कर रही पाकिस्तान सेना अब एक नए संकट में घिरती नजर आ रही है। वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की सिविल और सैन्य नेतृत्व को चेतावनी देते हुए खुली धमकी दे दी है। संगठन ने साफ कहा है कि वह तालिबान सरकार के साथ खड़ा है और अफगानिस्तान में पाकिस्तान की दखलअंदाजी को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा समीकरण को हिला दिया है और असीम मुनीर के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
हवाई हमलों के बाद भड़का आतंकी संगठन
अलकायदा का यह आक्रामक बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान ने हाल के महीनों में कई बार अफगानिस्तान के अंदर एयरस्ट्राइक की हैं। इन हमलों में नागरिकों के हताहत होने की खबरों ने पहले ही माहौल को तनावपूर्ण बना दिया था। अब अलकायदा ने इसे “मुस्लिम जमीन पर हमला” करार देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। सहाब मीडिया के जरिए जारी संदेश में संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार पश्चिमी देशों के साथ मिलकर “इस्लामी हितों” के खिलाफ काम कर रही है। अलकायदा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अफगानिस्तान से दूर रहे, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
तालिबान के समर्थन में खुलकर उतरा अलकायदा
अलकायदा ने अपने संदेश में तालिबान सरकार को “वैचारिक बदलाव का केंद्र” बताया और उसे पूर्ण समर्थन देने की बात कही। संगठन ने दावा किया कि अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता क्षेत्र में एक नई इस्लामी व्यवस्था का प्रतीक है, जिसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का जवाब दिया जाएगा। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि अतीत में ओसामा बिन लादेन और मुल्ला उमर के दौर से ही अलकायदा और तालिबान के बीच गहरे रिश्ते रहे हैं। अब एक बार फिर यह गठजोड़ खुलकर सामने आ गया है।
पाकिस्तानी सैनिकों से बगावत की अपील
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अलकायदा ने पाकिस्तान की सेना और जनता से सीधे बगावत करने की अपील की है। संगठन ने कहा कि पाकिस्तानी सैनिक सरकार के आदेशों को मानने से इनकार करें और “जिहादी लक्ष्यों” का समर्थन करें। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह रणनीति पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता फैलाने की कोशिश है। पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष झेल रहे पाकिस्तान में अगर सेना के भीतर असंतोष बढ़ता है तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
डूरंड लाइन बना टकराव का केंद्र
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद की जड़ डूरंड लाइन है। तालिबान इसे मानने से इनकार करता रहा है, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानकर वहां बाड़ लगा रहा है। हाल ही में सीमा पर कई झड़पें हुई हैं, जिनमें दोनों पक्षों को नुकसान हुआ है। तालिबानी लड़ाकों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया। नतीजतन सीमा पर व्यापार ठप हो गया है और हालात युद्ध जैसे बनते जा रहे हैं।
असीम मुनीर के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक तरफ तालिबान के साथ बढ़ता सीमा विवाद और दूसरी ओर अलकायदा की खुली धमकी। मुनीर लगातार तालिबान को सख्त संदेश दे रहे हैं, लेकिन अब आतंकी संगठन की सीधी चेतावनी ने उनकी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर पाकिस्तान अपनी कार्रवाई जारी रखता है तो उसे दो मोर्चों पर संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को “कायराना कदम” बताते हुए इसकी निंदा की है। भारत का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती है और आतंकवाद को बढ़ावा देती है।
क्षेत्रीय अस्थिरता का बढ़ता खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति दक्षिण एशिया के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। पाकिस्तान, तालिबान और अलकायदा के बीच बढ़ता तनाव किसी बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है। अगर अलकायदा अपने इरादों पर अमल करता है तो पाकिस्तान के अंदर आतंकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद भी और भड़क सकता है।