नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान 70 से 80 फीसदी तक की भारी छूट देखकर सामान खरीदने वाले ग्राहकों को अब गुमराह करना आसान नहीं होगा। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पहले कीमत बढ़ाकर फिर बड़ा डिस्काउंट दिखाने जैसे तरीकों पर सरकार शिकंजा कसने की तैयारी में है। नए नियमों के तहत कंपनियों को न सिर्फ डिस्काउंट की असल तस्वीर ग्राहक के सामने रखनी होगी, बल्कि सर्च रिजल्ट, स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट, रिटर्न-रिफंड और शिकायतों से जुड़ी जानकारी में भी पारदर्शिता बढ़ानी होगी।
30 दिन की पुरानी कीमत से खुलेगा डिस्काउंट का राज
ऑनलाइन खरीदारी में सबसे बड़ा बदलाव डिस्काउंट दिखाने के तरीके में होगा। किसी उत्पाद की कीमत घटाकर ऑफर दिखाते समय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को उसकी पिछली कीमत की जानकारी भी देनी होगी। यह वह कीमत होगी, जिस पर पिछले 30 दिनों के दौरान उस उत्पाद को बेचा गया था। इस व्यवस्था से किसी सामान की कीमत पहले बढ़ाकर फिर उस पर 50, 70 या 80 फीसदी की भारी छूट दिखाने जैसे हथकंडों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। ग्राहक खुद देख सकेगा कि उसे वास्तव में कितनी छूट मिल रही है।
सर्च रिजल्ट में भी नहीं चलेगी मनमानी
ई-कॉमर्स कंपनियों के सर्च सिस्टम को भी ज्यादा पारदर्शी बनाने की तैयारी है। प्लेटफॉर्म इस तरह सर्च रिजल्ट में हेरफेर नहीं कर सकेंगे, जिससे ग्राहक भ्रमित हो या उसकी खरीदारी का फैसला अनुचित तरीके से प्रभावित हो। पैसे देकर ऊपर दिखाए जाने वाले उत्पादों यानी स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग की पहचान भी स्पष्ट करनी होगी। ग्राहक को आसानी से पता चलना चाहिए कि उसके सामने दिखाई दे रहा उत्पाद सामान्य सर्च रिजल्ट है या भुगतान करके उसका प्रचार किया जा रहा है।
डार्क पैटर्न पर भी कसेगा शिकंजा
ग्राहकों को किसी खास विकल्प को चुनने के लिए उकसाने या भ्रमित करने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर भी सरकार की नजर है। कंपनियों को डार्क पैटर्न से संबंधित दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इसके लिए नियमित सेल्फ ऑडिट और अनुपालन से जुड़ी व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
शिकायत की कॉपी ग्राहक के पास रहेगी
ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को भी मजबूत करने का प्रस्ताव है। ई-कॉमर्स इकाइयों को नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की कन्वर्जेंस प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया है। शिकायत दर्ज कराने वाले ग्राहक को उस शिकायत की कॉपी उपलब्ध करानी होगी, जिसे ग्रीवांस ऑफिसर ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन को 17,71,622 शिकायतें मिली थीं। इनमें 5,11,196 शिकायतें ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं। यानी कुल शिकायतों में करीब 29 फीसदी हिस्सेदारी अकेले ऑनलाइन कारोबार से जुड़े मामलों की रही।
रिटर्न-रिफंड से लेकर वारंटी तक साफ बताना होगा
ऑनलाइन सामान बेचने वालों को उत्पाद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी होगी। जहां लागू हो वहां ‘बेस्ट बिफोर’ और ‘यूज बिफोर’ जैसी जानकारी ग्राहक से छिपाई नहीं जा सकेगी। इसके अलावा रिटर्न, रिफंड, वारंटी, डिलीवरी और भुगतान से जुड़ी शर्तें भी साफ-साफ बतानी होंगी। आयातित सामान के मामले में इंपोर्टर की जानकारी और ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ बताना भी जरूरी होगा। इसका उद्देश्य खरीदारी से पहले ग्राहक को उत्पाद और उससे जुड़ी शर्तों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराना है।
ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक को मिलेगा ज्यादा अधिकार
इन बदलावों का मकसद ई-कॉमर्स कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रामक डिस्काउंट, छिपी शर्तों तथा गुमराह करने वाले ऑनलाइन तरीकों से ग्राहकों को बचाना है। नियम लागू होने के बाद ग्राहक किसी बड़े डिस्काउंट के दावे को देखकर यह आसानी से जांच सकेगा कि ऑफर वास्तव में सस्ता है या सिर्फ कीमतों का खेल।