नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को ज्यादा ताकतवर बनाने की दुनिया भर में मची होड़ के बीच अब इसे विकसित करने वाले दिग्गज ही इसकी रफ्तार को लेकर चिंता जता रहे हैं। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने चेतावनी दी है कि AI मॉडल जिस तेजी से शक्तिशाली हो रहे हैं, उसी अनुपात में सुरक्षा इंतजाम मजबूत नहीं किए गए तो हथियार बनाने से लेकर साइबर हमलों, निगरानी और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी तक इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनके प्रस्ताव से ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और xAI के एलन मस्क ने भी सहमति जताई है।
AI को रोकना नहीं, रफ्तार नियंत्रित करने की मांग
अमोडेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि AI का विकास पूरी तरह रोकने की जरूरत नहीं है, लेकिन सबसे उन्नत मॉडल बनाने की मौजूदा रफ्तार को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। उनका कहना है कि इससे कंपनियों को नए मॉडल बाजार में उतारने से पहले उनकी सुरक्षा जांच करने और संभावित खतरों को समझने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। अमोडेई के मुताबिक, तकनीकी विकास धीमा करने के बाद भी AI तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। फर्क इतना होगा कि कंपनियों और सरकारों को सुरक्षा उपाय तैयार करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
AI कंपनियों के भीतर पहुंचें स्वतंत्र विशेषज्ञ
अमोडेई ने बड़ी AI कंपनियों में स्वतंत्र सुरक्षा विशेषज्ञों को तैनात करने का प्रस्ताव भी दिया है। उनका कहना है कि इन विशेषज्ञों को कर्मचारियों जैसी अंदरूनी पहुंच दी जानी चाहिए, ताकि वे मॉडल की क्षमताओं और उससे पैदा होने वाले खतरों की निष्पक्ष जांच कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने AI कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका मानना है कि बिना पर्याप्त जांच के ज्यादा शक्तिशाली मॉडल जारी करने की होड़ भविष्य में गंभीर संकट खड़ा कर सकती है।
सैम ऑल्टमैन बोले- स्वतंत्र जांच अच्छा विचार
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अमोडेई की चिंता से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI की रफ्तार को नियंत्रित करने का मुद्दा हाल के हफ्तों में उनकी कंपनी के भीतर भी चर्चा का विषय रहा है। स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं को अंदरूनी पहुंच देने के प्रस्ताव को उन्होंने अच्छा विचार बताया। एलन मस्क ने भी अमोडेई के रुख का समर्थन किया और कहा कि वह इस मुद्दे पर सही बात कह रहे हैं।
हथियार और साइबर हमलों में दुरुपयोग की चिंता
AI को लेकर नई चिंता ऐसे समय सामने आई है जब शक्तिशाली मॉडलों के गलत इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अमोडेई ने आशंका जताई कि AI का इस्तेमाल हथियारों से जुड़ी गतिविधियों, साइबर हमलों, निगरानी और धोखाधड़ी जैसे कामों में किया जा सकता है।
उन्होंने भविष्य के ऐसे ऑटोनॉमस AI सिस्टम को लेकर भी चिंता जताई है, जो कम मानवीय दखल के साथ बड़े पैमाने पर ऑनलाइन गतिविधियां संचालित कर सकें। उनका अनुमान है कि अगले छह से 12 महीनों में ऐसे सिस्टम इंटरनेट पर बड़े साइबर हमलों की क्षमता हासिल कर सकते हैं और इससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
चीन से मुकाबला भी बड़ी चुनौती
हालांकि अमोडेई AI के विकास पर पूरी तरह रोक लगाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका और अन्य लोकतांत्रिक देशों के सामने चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा की चुनौती भी है। ऐसे में सुरक्षा के लिए रफ्तार नियंत्रित करते समय यह भी ध्यान रखना होगा कि अत्याधुनिक AI तकनीक में रणनीतिक बढ़त हाथ से न निकले। उन्होंने एडवांस AI चिप्स और महत्वपूर्ण मॉडल डेटा की चोरी रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाने की जरूरत बताई। इस बहस ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—AI की ताकत बढ़ाने की वैश्विक दौड़ में सुरक्षा के लिए ब्रेक आखिर कब और कितना लगाया जाए?