sदुबई में इन बोर्डों की होती है पढ़ाई

नई दिल्ली। विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों को बच्चों की पढ़ाई को लेकर अक्सर चिंता रहती है कि उन्हें भारत जैसा पाठ्यक्रम मिलेगा या नहीं। खासकर ऐसे परिवार, जो भविष्य में भारत लौटने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए सही शिक्षा बोर्ड का चुनाव बेहद अहम हो जाता है। दुबई में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए राहत की बात यह है कि वहां CBSE और ICSE समेत भारतीय पाठ्यक्रम पर आधारित कई स्कूल संचालित हो रहे हैं।

दुबई की शिक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाली नॉलेज एंड ह्यूमन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KHDA) के तहत अलग-अलग पाठ्यक्रमों वाले स्कूल संचालित होते हैं। इनमें भारतीय पाठ्यक्रम वाले स्कूल भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।

CBSE सबसे प्रमुख विकल्प

दुबई में भारतीय पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई कराने वाले स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) सबसे प्रमुख विकल्पों में शामिल है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को CBSE के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाया जाता है। कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र CBSE बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी भी इसी व्यवस्था के तहत करते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलता है, जो नौकरी या कारोबार के कारण कुछ वर्षों के लिए UAE में रह रहे हैं और बाद में भारत लौटना चाहते हैं। बच्चों को भारत लौटने पर पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव का सामना अपेक्षाकृत कम करना पड़ता है।

ICSE और ISC का विकल्प भी उपलब्ध

दुबई में केवल CBSE ही नहीं, बल्कि काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) से जुड़े स्कूलों का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि इनकी संख्या CBSE स्कूलों के मुकाबले कम है। ऐसे स्कूल विद्यार्थियों को कक्षा 10वीं में ICSE और कक्षा 12वीं में ISC परीक्षा के लिए तैयार करते हैं। इसके अलावा केरल स्टेट बोर्ड से जुड़े पाठ्यक्रम का विकल्प भी उपलब्ध है। यह व्यवस्था खासतौर पर केरल से जुड़े उन परिवारों के लिए उपयोगी है, जो विदेश में रहते हुए भी बच्चों की पढ़ाई अपने राज्य के पाठ्यक्रम के अनुरूप जारी रखना चाहते हैं।

भारत लौटने की योजना वाले परिवारों के लिए सहूलियत

दुबई में भारतीय बोर्ड के स्कूल उपलब्ध होने से अभिभावकों के सामने विकल्प बढ़ जाते हैं। ऐसे परिवार, जिनका रोजगार या व्यवसाय UAE में है लेकिन बच्चों की उच्च शिक्षा भारत में कराने की योजना है, वे भारतीय पाठ्यक्रम को जारी रख सकते हैं। CBSE का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं है। विदेशों में भी इससे संबद्ध स्कूल संचालित होते हैं। ऐसे में भारतीय परिवार विदेश में रहते हुए बच्चों को भारतीय शिक्षा व्यवस्था से जोड़े रख सकते हैं और भविष्य में भारत लौटने पर उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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