पुणे। महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी के लिए खेल कोटे का फायदा दिलाने के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्रों का बड़ा खेल सामने आया है। पुणे सिटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ऐसे कथित रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें कुराश खेल के फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर तीन से पांच लाख रुपये तक में बेचने का आरोप है। पुलिस को आशंका है कि करीब 500 से 600 लोगों ने इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। यदि जांच में यह संख्या और रकम सही साबित होती है तो पूरा खेल करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
मामले में शिवाजीनगर पुलिस थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल समेत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने तीन सितंबर को 49 वर्षीय शिवाजी जयवंत सालुंखे और 40 वर्षीय अंकुश विठ्ठल नगर को गिरफ्तार किया। अदालत ने दोनों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
2016 से 2022 तक के रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
पुलिस की जांच का दायरा वर्ष 2016 से 2022 के बीच आयोजित कुराश प्रतियोगिताओं और उनसे जुड़े प्रमाणपत्रों तक पहुंच गया है। आरोप है कि 2016 से 2019 के बीच कुछ प्रतियोगिताएं ऐसी संस्था के माध्यम से कराई गईं, जो कथित रूप से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ से संबद्ध नहीं थी। जांच एजेंसियों को संदेह है कि पुरानी प्रतियोगिताओं के रिकॉर्ड में हेरफेर कर अभ्यर्थियों के नाम बाद में जोड़े गए और बैकडेट में भागीदारी के प्रमाणपत्र तैयार किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ ऐसे लोगों को भी खिलाड़ी दिखाकर प्रमाणपत्र देने का आरोप है, जिन्होंने संबंधित प्रतियोगिताओं में हिस्सा तक नहीं लिया था।
एक खिलाड़ी को हुआ शक और खुलती चली गईं परतें
इस कथित फर्जीवाड़े का खुलासा भी एक खिलाड़ी की सतर्कता से हुआ। सरकारी नौकरी के लिए खेल कोटे से आवेदन करने वाले खिलाड़ी को कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध लगे। उसे पता चला कि कुछ उम्मीदवारों ने ऐसे खेल के प्रमाणपत्र लगाए हैं, जिसे उन्होंने कभी खेला ही नहीं था। इसके बाद प्रमाणपत्रों और प्रतियोगिताओं के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। दस्तावेजों में कथित गड़बड़ियां सामने आने पर पुलिस से शिकायत की गई। क्राइम ब्रांच ने जांच आगे बढ़ाई तो मामला केवल कुछ प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं रहा और बड़े नेटवर्क की आशंका सामने आने लगी।
पुणे पुलिस में भर्ती 19 अभ्यर्थियों पर भी जांच की आंच
मामले का सबसे गंभीर पहलू सरकारी भर्तियों से जुड़ा है। शुरुआती जांच में पुणे सिटी पुलिस में भर्ती हुए 19 अभ्यर्थियों द्वारा कथित फर्जी कुराश प्रमाणपत्रों के जरिए पांच प्रतिशत खेल कोटे का लाभ लेने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इसी तरीके से पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस समेत महाराष्ट्र के अन्य सरकारी विभागों की भर्तियों में भी फर्जी प्रमाणपत्र लगाए गए। जांच का दायरा बढ़ने पर और सरकारी कर्मचारियों अथवा अभ्यर्थियों के नाम सामने आ सकते हैं।
प्रमाणपत्रों में जिलों तक के नाम बदलने का शक
जांच में प्रमाणपत्रों पर दर्ज जिलों और संबंधित तारीखों को लेकर भी कथित विसंगतियां मिली हैं। पुलिस को शक है कि फर्जीवाड़े को असली दिखाने के लिए कुछ प्रमाणपत्रों में जिलों के नाम तक बदले गए। प्रशासनिक रिकॉर्ड से मिलान के दौरान अंतर मिलने के बाद संदेह और गहरा गया। पुलिस के मुताबिक अंकुश नगर जूडो खिलाड़ी और कारोबारी है तथा उसने कथित रूप से खुद को महाराष्ट्र कुराश एसोसिएशन का अध्यक्ष बताया था। शिवाजी सालुंखे भी इस संगठन से पदाधिकारी के रूप में जुड़ा बताया गया है।
500 से 600 प्रमाणपत्रों का शक, करोड़ों में पहुंच सकता है खेल
यदि एक प्रमाणपत्र के बदले तीन से पांच लाख रुपये लिए जाने और 500 से 600 लोगों तक प्रमाणपत्र पहुंचने का पुलिस का शुरुआती संदेह जांच में सही साबित होता है, तो रकम कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि वास्तविक राशि का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही होगा। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त तेजस्विनी सातपुते के मुताबिक शुरुआती जांच में मामला बड़ा होने के संकेत मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तव में कितने फर्जी प्रमाणपत्र जारी हुए, उनके सहारे कितने लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की और पूरे नेटवर्क में कितने रुपये का लेन-देन हुआ। इसके साथ ही इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।