बरेली। फर्जी फर्मों के जरिए 118 करोड़ रुपये के जीएसटी फ्रॉड का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम थाना और एसआईटी ने संयुक्त कार्रवाई कर इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर आईटीसी का फर्जी लाभ लेने के आरोप में पकड़े गए हैं। आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद हुए हैं।
मामले की शुरुआत पीसी इंटरप्राइजेस नाम की एक फर्म से हुई थी। जांच में सामने आया कि इस फर्म के जरिए करीब 20 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर 1.28 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी फ्रॉड किया गया। लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो यह सिर्फ एक फर्म का मामला नहीं निकला। कड़ियां जुड़ती गईं और करीब एक दर्जन फर्जी फर्मों के जरिए 118 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन का पूरा नेटवर्क सामने आ गया। लंबे समय से तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट पर काम कर रही टीम ने 21 जुलाई को मालगोदाम रोड स्थित रेलवे लाइन के पास से गाजियाबाद निवासी योगेंद्र शर्मा और साहिबाबाद निवासी टिम्पु को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने फर्जी फर्मों के नेटवर्क और करोड़ों के लेनदेन से जुड़े कई अहम राज उगले हैं।
छापे में मिला ‘काले कारोबार’ का पूरा हिसाब
आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड, बैंक चेकबुक, 3.18 करोड़ रुपये से अधिक के हस्ताक्षरित चेक, दर्जनों खाली चेक और 100 से ज्यादा दस्तावेज बरामद हुए। एक लाल डायरी में करोड़ों रुपये का हिसाब-किताब, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और कई संदिग्ध फर्मों का रिकॉर्ड दर्ज मिला। जांच टीम को डिजिटल वॉलेट से जुड़े 117.18 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड भी हाथ लगे हैं। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह पहले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते और फर्जी फर्में खुलवाता था। इसके बाद इन्हीं फर्मों के नाम से फर्जी ई-वे बिल, नकली खरीद-बिक्री और जीएसटी रिटर्न तैयार किए जाते थे। कागजों में कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया जाता और फिर सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए रकम अलग-अलग खातों में घुमाकर नकदी में बदल दी जाती थी।
सर्राफा कारोबार, डिजिटल वॉलेट और हवाला से जुड़ती हैं कड़ियां
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी कारोबार से निकाली गई रकम को सर्राफा कारोबार, डिजिटल वॉलेट और हवाला नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगाया जाता था। नकदी के बंटवारे के लिए गिरोह कथित तौर पर नोटों के सीरियल नंबर तक को ‘कोड भाषा’ के रूप में इस्तेमाल करता था, ताकि पूरे नेटवर्क का कोई सिरा आसानी से हाथ न लगे। एसपी क्राइम मनीष सोनकर ने बताया कि अब तक की जांच में करीब एक दर्जन फर्जी फर्मों के जरिए 118 करोड़ रुपये के फर्जी कारोबार के साक्ष्य मिले हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और बरामद दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच की जा रही है। कार्रवाई करने वाली टीम के लिए 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा भी की गई है।