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एडीजी रमित शर्मा ने किया आदर्श अंगूर उद्यान का उद्घाटन, एक हजार बेलों का होगा रोपण; किसानों और शोधार्थियों को मिलेंगी आधुनिक तकनीकों की जानकारी

बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कृषि एवं उद्यानिकी अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद मार्ग के किनारे विकसित किए जा रहे ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ में स्पेन और इटली से आयातित अंगूर की उन्नत एवं उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियां विकसित की जाएंगी। शनिवार को बरेली जोन के एडीजी डॉ. रमित शर्मा ने विश्वविद्यालय पहुंचकर ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर कुलपति प्रो. केपी सिंह समेत विश्वविद्यालय के कई शिक्षक और अधिकारी मौजूद रहे।

एडीजी ने किया बेलों का रोपण, विश्वविद्यालय की पहल को सराहा

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि एडीजी डॉ. रमित शर्मा और कुलपति प्रो. केपी सिंह ने अंगूर की बेलों का रोपण किया। एडीजी ने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयोग विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर व्यावहारिक ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ किसानों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। यहां अंगूर उत्पादन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग और अध्ययन किया जाएगा, जिससे भविष्य में कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र को नई संभावनाएं मिलेंगी।

मॉडल डेमोन्स्ट्रेशन और रिसर्च सेंटर के रूप में होगा विकसित

कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ विश्वविद्यालय की कृषि, उद्यानिकी, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इसे केवल अंगूर की खेती तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य में इसे मॉडल डेमोन्स्ट्रेशन एवं रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।

उद्यान में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंगूर की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही आसपास के किसानों को भी वैज्ञानिक तरीके से अंगूर की खेती करने की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।

बेलों की छंटाई से लेकर रोग नियंत्रण तक होगा अध्ययन

आदर्श अंगूर उद्यान में अंगूर की खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों पर व्यावहारिक कार्य किया जाएगा। इसमें बेलों का प्रशिक्षण एवं छंटाई, माइक्रो-इरिगेशन, फर्टिलाइजेशन, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन जैसी तकनीकों का अध्ययन शामिल है।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य इन तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करना है, ताकि किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फल प्राप्त करने के वैज्ञानिक तरीके उपलब्ध हो सकें।

48 किस्मों की एक हजार बेलें लगाई जाएंगी

कुलपति ने बताया कि आदर्श अंगूर उद्यान को समृद्ध बनाने के लिए स्पेन और इटली से अंगूर की करीब 48 उन्नत एवं उच्च गुणवत्ता वाली किस्में आयात की गई हैं। इन किस्मों की लगभग एक हजार बेलों का रोपण किया जाएगा।

इन विदेशी किस्मों को बरेली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में विकसित कर उनकी अनुकूलता, उत्पादन क्षमता, फल की गुणवत्ता और व्यावसायिक संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। शोध के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास होगा कि इनमें से कौन-कौन सी किस्में स्थानीय जलवायु में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

‘फील्ड लैबोरेटरी’ के रूप में विकसित होगा उद्यान

प्रो. उपेंद्र कुमार ने बताया कि ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का उद्देश्य केवल अंगूर की खेती करना नहीं है। इसे एक ‘फील्ड लैबोरेटरी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां अंगूर की विभिन्न प्रजातियों पर प्रयोग और शोध किए जा सकेंगे।

उन्होंने बताया कि अंगूर की बेलों को उचित सहारा देने के लिए उद्यान में करीब 300 ट्रेलिस लगाए गए हैं। इनके माध्यम से बेलों को वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंगूर की व्यावसायिक खेती की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा।

किसानों के लिए भी खुलेगा नई संभावनाओं का रास्ता

विश्वविद्यालय की इस पहल को बरेली और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि विदेशी अंगूर की उन्नत किस्में स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों में सफल होती हैं तो आने वाले समय में किसान पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों की ओर भी रुख कर सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. आलोक श्रीवास्तव, प्रो. अजीत सिंह, प्रो. रवींद्र, डॉ. विनय वर्मा, तपन वर्मा, डॉ. अनिल साहनी, डॉ. प्रिया सक्सेना समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।

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