बरेली। रक्षाबंधन पर शहर में करोड़ों रुपये की मिठाई बिक गई और लोग उसे खरीदकर घर भी ले गए। लेकिन मिठाई सही थी या उसमें मिलावट थी, इसका पता अभी नहीं चल पाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने रक्षाबंधन से एक दिन पहले मिठाई और खाने के सामान के सैंपल लिए हैं। अब इन्हें जांच के लिए भेज दिया गया है। विभाग के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल के मुताबिक सैंपलों की रिपोर्ट करीब एक माह बाद आएगी। ऐसे में सवाल है कि अगर मिठाई में मिलावट मिली तो तब तक उसे खा चुके लोगों का क्या होगा।
26 अगस्त को FSDA की चार टीमों ने शहर और देहात में कई जगह छापेमारी की। रामपुर रोड स्थित किप्स स्वीट्स से बर्फी और काजू कतली के सैंपल लिए गए। बड़ा बाजार स्थित दीपक स्वीट्स से घेवर और सोनपापड़ी के नमूने लिए गए। डोहरा रोड स्थित इंड्स अजन्ता से बेसन के लड्डू और घेवर के सैंपल लिए गए। खाद्य सुरक्षा टीम मुड़िया अहमद नगर स्थित रेडिसन होटल पहुंची। यहां से पनीर का नमूना लिया गया। रामगंगा चौकी पर बिक्री के लिए ले जाए जा रहे पनीर का भी सैंपल लिया गया। बहेड़ी के पड़ेरा और मवई काजियान से बर्फी के नमूने लिए गए।
खोया और दूध की लॉज भी जांच के घेरे में
फतेहगंज पूर्वी स्थित सोहन लाल मिष्ठान भंडार से खोया का नमूना लिया गया। फरीदपुर के बाजारिया इलाके में विनोद लॉज वालों से दूध की लॉज का सैंपल भरा गया। विभाग ने इन सभी नमूनों को जांच के लिए भेज दिया है। FSDA की कार्रवाई उस समय हुई जब रक्षाबंधन की खरीदारी जोरों पर थी। दुकानों पर मिठाई की बिक्री जारी थी। टीम ने नमूने लिए और उन्हें जांच के लिए भेज दिया। लेकिन तब तक त्योहार की मिठाई बाजार में बिकती रही। अब अगर किसी सैंपल में मिलावट निकलती है तो रिपोर्ट आने तक वह मिठाई हजारों लोगों के घरों में पहुंच चुकी होगी।
अधिकारी बोले- एक माह बाद आएगी रिपोर्ट
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल ने बताया कि लिए गए सैंपल जांच के लिए झांसी स्थित लैब भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो सैंपल लिए गए हैं, उनकी रिपोर्ट करीब एक माह बाद आएगी। यही बात FSDA की कार्रवाई पर सवाल खड़े करती है। रक्षाबंधन की तारीख पहले से तय थी और मिठाई की बिक्री भी त्योहार से कई दिन पहले शुरू हो जाती है। ऐसे में अगर सैंपल कुछ दिन पहले लिए जाते और रिपोर्ट समय पर आती तो गड़बड़ी मिलने पर संबंधित मिठाई की बिक्री रोकी जा सकती थी।
अगर सैंपल फेल हुआ तो क्या होगा?
अगर किसी दुकान की मिठाई जांच में फेल होती है तो विभाग बाद में संबंधित कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई करेगा। लेकिन तब तक वह मिठाई बिक चुकी होगी और लोग उसे खा चुके होंगे। यानी मिलावट का पता उस समय चलेगा, जब उसे रोकने का समय निकल चुका होगा। FSDA की कार्रवाई 27 अगस्त को भी जारी रही। मौलागढ़ में शेरखान से बर्फी और आसपुर गौटिया में इदरीस से मिल्क केक का नमूना लिया गया। इनकी भी जांच कराई जाएगी।
सहायक आयुक्त ने फोन नहीं उठाया
मामले में सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय राहुल सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। अब सवाल यही है कि जब रक्षाबंधन पर मिठाई की बिक्री पहले से तय थी तो सैंपलिंग पहले क्यों नहीं की गई, अगर रिपोर्ट एक माह बाद आएगी तो मिलावट मिलने पर कार्रवाई का असर कितना होगा। लोगों को सैंपल की संख्या नहीं, सुरक्षित मिठाई चाहिए और इसके लिए समय पर जांच और कार्रवाई जरूरी है।