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पीलीभीत। जिला अस्पताल के सीटी स्कैन कक्ष में पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल की नृशंस हत्या अब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहेगी। इस हत्याकांड ने शासन का दरवाजा खटखटा दिया है। चार दिन तक घटनाक्रम, छात्रों के विरोध, सुरक्षा व्यवस्था और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली का बारीकी से परीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने शासन को ऐसी विस्तृत रिपोर्ट भेजी है, जिसमें पूरे मामले की हाईलेवल और स्वतंत्र जांच कराने की सिफारिश की गई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब जांच का दायरा सिर्फ आरोपी तक नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने तक बढ़ सकता है।

डीएम की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह केवल हत्या का मामला नहीं है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश व्यवस्था, प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक सिस्टम को लेकर छात्रों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यदि इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो घटना के पीछे छिपी व्यवस्थागत कमियां कभी सामने नहीं आ पाएंगी। इसी वजह से शासन से स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की गई है।

शासन को भेजी गई ‘पूरी केस डायरी’

रिपोर्ट में 13 जुलाई की सुबह का पूरा घटनाक्रम दर्ज किया गया है। बताया गया कि पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल प्रशिक्षण के दौरान सीटी स्कैन कक्ष में थी, तभी उसके सहपाठी सागर सिंह ने चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे, आरोपी को गिरफ्तार किया गया और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी। पूरे घटनाक्रम को क्रमवार शासन के सामने रखा गया है। कशिश की हत्या के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्र-छात्राओं ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नाकाम बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि परिसर में सुरक्षा गार्डों की कमी, सीसीटीवी की कमजोर निगरानी और प्रवेश व्यवस्था में लापरवाही के कारण छात्राएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। यही विरोध अब शासन की रिपोर्ट का अहम हिस्सा बन गया है।

प्रशासनिक जिम्मेदारी भी होगी तय

डीएम की रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज प्रशासन से मिली जानकारी भी शामिल की गई है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि जांच में सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। यानी अब जांच केवल हत्या की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की होगी। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि शासन को भेजी गई रिपोर्ट में स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। छात्रों की ओर से उठाए गए सभी सुरक्षा संबंधी मुद्दों की गंभीरता से जांच कराई जानी आवश्यक है। प्रशासन पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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