बरेली। फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान और कंपनी के सिस्टम में सेंध लगाकर 39 मोटरसाइकिलों के फाइनेंस में लाखों रुपये का खेल खेला गया। ग्राहकों से वसूला गया पैसा कंपनी तक पहुंचने के बजाय कर्मचारियों की जेब में जाता रहा। करीब डेढ़ साल पुराने इस फाइनेंस फ्रॉड में किला पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
श्रीराम फाइनेंस कंपनी के रीजनल बिजनेस हेड मुरसलीम ने 17 अप्रैल 2025 में किला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि कंपनी के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों समेत 42 लोगों ने मिलकर फर्जी नाम, बदले हुए आधार-पैन कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दोपहिया वाहनों का फाइनेंस कराया। इसके बाद ग्राहकों से वसूली गई रकम कंपनी में जमा करने के बजाय आपस में बांट ली गई।
39 बाइक फाइनेंस, पैसा कंपनी की जगह जेब में
जांच में सामने आया कि गिरोह ने 39 मोटरसाइकिलों के फाइनेंस में गड़बड़ी की। ग्राहक से डाउन पेमेंट और अन्य रकम लेने के बाद फाइनेंस की राशि का पूरा हिसाब कंपनी को नहीं दिया जाता था। दस्तावेजों में ऐसी हेराफेरी की जाती थी कि बाद में कंपनी वास्तविक ग्राहकों तक भी नहीं पहुंच पाती थी। किला पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सत्यप्रकाश पार्क के पास से कुंवरपुर तुलसीपट्टी निवासी चन्द्रभानु को गिरफ्तार किया। वह इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पूछताछ में खोले कई राज
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह श्रीराम फाइनेंस में सेल्स से जुड़ा था। उसका काम ग्राहकों के दस्तावेज जुटाकर फाइल तैयार करना था। उसने स्वीकार किया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े में शामिल था। ग्राहकों के आधार और पैन कार्ड में बदलाव कर फाइलें आगे भेजी जाती थीं। फाइनेंस की रकम का पूरा पैसा कंपनी में जमा नहीं किया जाता था और बची रकम आपस में बांट ली जाती थी। किला इंस्पेक्टर अचल कुमार का कहना है कि इस मामले में पहले से ही 42 लोगों को आरोपी बनाया गया है। गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर अन्य फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस फाइनेंस फर्जीवाड़े में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।