बरेली। घर के पास खेल रही छह साल की इनाया को क्या पता था कि कुछ ही पलों में उसकी जिंदगी खत्म हो जाएगी। रविवार दोपहर सीबीगंज के लटूरी गांव में आवारा कुत्तों का झुंड बच्चों के बीच घुसा और इनाया पर टूट पड़ा। दूसरे बच्चे जान बचाकर भाग निकले, लेकिन मासूम कुत्तों के बीच फंस गई। खूंखार कुत्ते उसे नोचते हुए करीब 100 मीटर दूर खेतों तक घसीट ले गए। बच्चों की चीख सुनकर ग्रामीण दौड़े और कुत्तों को भगाया, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने इनाया को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद अब लटूरी ही नहीं, आसपास के गांवों में भी बच्चों को लेकर दहशत है।
100 मीटर तक घसीटते रहे कुत्ते, बचाने दौड़े ग्रामीण
हमले की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुत्ते इनाया को घर के पास से करीब 100 मीटर तक घसीटकर खेतों की ओर ले गए। उसके साथ खेल रहे बच्चों ने किसी तरह भागकर जान बचाई और गांव पहुंचकर शोर मचाया। बच्चों की चीख-पुकार सुन ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर दौड़े। कुत्तों को खदेड़कर इनाया को छुड़ाया गया तो वह लहूलुहान थी। गर्दन समेत शरीर पर गहरे जख्म थे। परिजन उसे तत्काल निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
तीन बहनों में सबसे बड़ी थी इनाया, घर में पसरा मातम
लटूरी गांव निवासी इसहाक खां परचून की दुकान चलाते हैं। परिवार में पत्नी आसिया और तीन बेटियां इनाया, अलीजा और इनायत हैं। इनाया तीनों बहनों में सबसे बड़ी थी। रविवार दोपहर तक जिस घर में बच्चियों की चहक थी, कुछ ही घंटों बाद वहां मातम पसर गया। मासूम की मौत से मां-बाप बदहवास हैं और गांव में घटना को लेकर गम के साथ गुस्सा भी है।
लटूरी ही नहीं, पस्तोर-बंडिया तक कुत्तों का खौफ
इनाया की मौत के बाद आवारा कुत्तों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ लटूरी तक सीमित नहीं है। पस्तोर, मथुरापुर, बंडिया और तिलियापुर समेत आसपास के इलाकों में कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। हालात ऐसे हैं कि अब लोग छोटे बच्चों को घर से अकेले बाहर भेजने में डर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पहले भी कुत्तों के हमलों में बच्चे गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं और कई घटनाओं में जान तक जा चुकी है।
आखिर कब थमेगा आवारा कुत्तों का आतंक
छह साल की इनाया की मौत ने आवारा कुत्तों की समस्या को एक बार फिर बेहद गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों का सवाल है कि लगातार हमलों के बावजूद कुत्तों के झुंड आबादी के बीच कैसे घूम रहे हैं। एक मासूम की जान जाने के बाद लोगों ने अब प्रभावी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि सिर्फ घटना के बाद हलचल से काम नहीं चलेगा, कुत्तों के आतंक से स्थायी निजात दिलानी होगी।