बरेली। जिले में वर्षों से कब्जे और बेहद मामूली किराये में फंसी शत्रु संपत्तियों पर अब प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने वाली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद जिले की 212 शत्रु संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। इनमें 118 संपत्तियों का नामांतरण कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया के नाम हो चुका है, जबकि 94 मामलों की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सबसे अधिक 69 लंबित प्रकरण सदर तहसील में हैं। सीमांकन और मूल्यांकन के बाद कब्जे हटाकर नियमानुसार नीलामी कराने की तैयारी है।

सदर में सर्वाधिक 120 शत्रु संपत्तियां, मीरगंज में एक भी नहीं

प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में कुल 212 शत्रु संपत्तियां चिह्नित हैं। इनमें सदर तहसील में सर्वाधिक 120 और आंवला में 71 संपत्तियां हैं। बहेड़ी में 13 तथा फरीदपुर और नवाबगंज में चार-चार शत्रु संपत्तियां दर्ज हैं। मीरगंज तहसील में इस श्रेणी की कोई संपत्ति नहीं है। अब तक फरीदपुर की चार, बहेड़ी की छह, आंवला की 57 और सदर की 51 संपत्तियों को चिह्नित कर कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया के नाम किया जा चुका है। सदर में 69, आंवला में 13 और बहेड़ी में सात प्रकरणों का निस्तारण शेष है।

करोड़ों की जमीन, कहीं किराया सिर्फ 10 तो कहीं 100 रुपये

शत्रु संपत्तियों से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला पहलू उनका किराया है। जिले में कई बेशकीमती संपत्तियों से महज 10 से 100 रुपये तक किराया मिलने की स्थिति सामने आई है। समय के साथ कुछ स्थानों पर आवास बन गए तो कहीं निजी अथवा सरकारी कार्यालय संचालित होने लगे। अवैध कब्जों से संबंधित शिकायतें लखनऊ स्थित अभिरक्षक कार्यालय तक भी पहुंचती रही हैं। इसी सिलसिले में जून में दो सदस्यीय टीम ने बरेली पहुंचकर आवासीय शत्रु संपत्तियों का सर्वे किया था। अब शासन के निर्देश पर संयुक्त टीम के माध्यम से सीमांकन, कब्जे की स्थिति और संपत्तियों के मूल्य का आकलन किया जाएगा।

पहले कब्जेदार को मिलेगा खरीदने का अवसर, इनकार पर नीलामी

सरकारी व्यवस्था के तहत निर्धारित मूल्य सीमा वाली शत्रु संपत्तियों की बिक्री में मौजूदा कब्जेदार को नियमानुसार पहला अवसर दिया जा सकता है। उसके इनकार करने की स्थिति में संपत्ति नीलामी प्रक्रिया में जाएगी। इसके लिए जिला मूल्यांकन समिति गठित की गई है। समिति में तहसीलदार, उप निबंधक, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता तथा लखनऊ से नामित शत्रु संपत्ति पर्यवेक्षक और सर्वेक्षक शामिल हैं।

नगर निगम क्षेत्र में करीब 60 नामांतरण अटके

सदर तहसील में लंबित मामलों की संख्या अधिक होने के पीछे नगर निगम क्षेत्र की करीब 60 संपत्तियों का नामांतरण नहीं हो पाना भी एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। शासन के निर्देश के बाद अब संयुक्त टीम बनाकर इन मामलों को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

ठिरिया में पाकिस्तानी नागरिक की संपत्ति का रिकॉर्ड फिर खंगाला

ठिरिया निजावत खां में पाकिस्तानी नागरिक मुशफिकुल हसन से जुड़ी घोषित शत्रु संपत्तियों के अभिलेख भी दोबारा जांच के दायरे में आए हैं। शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय लखनऊ ने सदर तहसील से चकबंदी के दौरान बने नए गाटों से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक एक अक्टूबर 1971 को मुशफिकुल हसन के 10 खातों को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था। सितंबर 2025 में प्रशासन ने संबंधित गाटों की मूल्यांकन रिपोर्ट भेजी थी। अब अभिरक्षक कार्यालय ने पुराने खातों और गाटों का नए गाटों से मिलान कर निर्धारित प्रारूप में विस्तृत जानकारी मांगी है।

क्या होती है शत्रु संपत्ति?

भारत-चीन युद्ध 1962 तथा भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 और 1971 के दौरान भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए और वहां की नागरिकता लेने वाले लोगों अथवा कंपनियों की भारत में मौजूद चल-अचल संपत्तियां इस श्रेणी में आती हैं। ऐसी संपत्तियां शत्रु संपत्ति अधिनियम के प्रावधानों के तहत सरकार के नियंत्रण में रहती हैं।

एडीएम सिटी बोले—सीमांकन के बाद कब्जे हटाकर होगा मूल्यांकन

एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी के मुताबिक फिलहाल तहसीलों में शत्रु संपत्तियों का सीमांकन कराया जा रहा है। इसके बाद उन्हें कब्जामुक्त कराकर मूल्यांकन किया जाएगा और नियमानुसार नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कब्जेदारों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

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