बरेली। फर्जी फर्मों और बोगस इनवॉइस के जरिये करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी-आईटीसी चोरी के मामले में जांच अब सिंडिकेट से आगे बढ़कर कथित लाभार्थी कंपनियों तक पहुंच गई है। एसआईटी के रडार पर 17 फर्में हैं, जबकि फरार छह आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। सोबती इंफ्रा और सोबती इंफ्राटेक का नाम जांच के दायरे में आने के बाद पुलिस अब इनके बेनिफिशियरी की भूमिका खंगाल रही है। एसएसपी अनुराग आर्य ने जांच के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं एसपी क्राइम मनीष सोनकर ने एसआईटी के विवेचकों के साथ समीक्षा कर कार्रवाई तेज करने की रणनीति बनाई है।
सिंडिकेट पर वार के बाद अब 17 फर्मों की कुंडली खंगाल रही SIT
जांच में एफएस ट्रेडर्स, सिद्धि विनायक एंटरप्राइज, मां एंटरप्राइज, नाइट स्टार, आर्ट लाइफ हुडा, आर्ट लाइफ एसोसिएट, अरहम एग्रो फूड्स और केएच एंटरप्राइज के नाम कथित फर्जी इनवॉइसिंग से जुड़े होने की बात सामने आई है। इसके अलावा एनडी रेलवे, एमएस रोड लाइन, सोबती इंफ्रा, सोबती इंफ्राटेक, पावर एंड कंस्ट्रक्शन, बसी एंटरप्राइजेज, पैंटा स्टार, मीना गुप्ता और श्रीनाथजी एंटरप्राइजेज समेत अन्य फर्मों की भूमिका भी जांची जा रही है। इनमें शहर के बड़े कारोबार से जुड़े नाम सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
सोबती इंफ्रा-इंफ्राटेक के बेनिफिशियरी पर फोकस, खुल सकती हैं सिंडिकेट की अगली परतें
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी इनवॉइस से तैयार कथित आईटीसी का अंतिम लाभ किन लोगों और कंपनियों तक पहुंचा। इसी कड़ी में सोबती इंफ्रा और सोबती इंफ्राटेक से जुड़े बेनिफिशियरी भी जांच के केंद्र में हैं। पुलिस का मानना है कि संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद लेनदेन की चेन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य किरदारों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। एसएसपी ने विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पांच और भेजे गए जेल, नेपाल से ‘संदीप’ बनकर नेटवर्क चलाने का दावा
एसआईटी ने मंगलवार को कर्मचारी नगर निवासी सागर अग्रवाल, फर्म संचालक एवं कथित ऑपरेटर फरजान/फुरकान हाशमी, ख्वाजा कुतुब क्षेत्र के विनीत अरोड़ा, खैरुल्ला गली निवासी अनुज अग्रवाल और नीम की चढ़ाई निवासी शिवम गुप्ता उर्फ लाला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस जांच में दावा किया गया है कि हाशमी नेपाल में छिपकर ‘संदीप’ नाम से नेटवर्क संचालित कर रहा था और जांगी ऐप के माध्यम से साथियों को कथित फर्जी बिल उपलब्ध कराता था। पूछताछ में सागर अग्रवाल की भूमिका फर्जी फर्म उपलब्ध कराने और वास्तविक कंपनियों तक बोगस आईटीसी पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आने का दावा किया गया है। इससे पहले सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
डीएम कंपाउंड के सामने कार्यालय से चलती थी कथित फर्जी फर्मों की चेन
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि विनीत अरोड़ा, अनुज अग्रवाल, शिवम उर्फ लाला समेत अन्य सहयोगियों के साथ डीएम कंपाउंड के सामने कार्यालय खोलकर कथित तौर पर फर्जी फर्मों की चेन संचालित की जा रही थी। एसआईटी अब बिल, इनवॉइस, आईटीसी ट्रांसफर और इससे लाभ लेने वाली फर्मों के बीच कनेक्शन जोड़कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में लगी है।
छह अभी फरार, ठिकानों पर दबिश; SIT को जल्द गिरफ्तारी के निर्देश
मामले में अरहम एग्रो फूड्स के संचालक सैय्यद सैफ उर्फ सैय्यद मोइउद्दीन अहमद, सह संचालक शाजिर, दिल्ली के लक्ष्मीनगर निवासी आसिफ, बटलर प्लाजा के तौसीफ, फिरोज और रामपुर निवासी फम्मी उर्फ फराज की तलाश जारी है। इनकी गिरफ्तारी के लिए एसआईटी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
‘सिफारिशों’ का दौर शुरू, पुलिस का दावा—विवेचना तय करेगी कार्रवाई
बड़ी फर्मों के नाम जांच में आने के बाद संबंधित लोगों की ओर से स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर तक सिफारिशें कराए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि विवेचना को इससे प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और जिसकी भूमिका साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगी, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार रात एसपी क्राइम मनीष सोनकर ने कैंट थाने में मुख्य विवेचक इंस्पेक्टर संजय धीर समेत एसआईटी के अन्य सदस्यों के साथ पूरे प्रकरण की समीक्षा की। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ संदिग्ध फर्मों के लेनदेन और कथित लाभार्थियों की भूमिका की जांच तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की अगली कार्रवाई अब यह साफ कर सकती है कि करीब 100 करोड़ रुपये के इस कथित टैक्स फ्रॉड की चेन आखिर कहां तक फैली हुई थी।