बरेली। भमोरा थाना क्षेत्र में करीब 26 महीने पहले हुई रामबेटी की हत्या के मामले में चौंकाने वाला मोड़ आया है। जिन लोगों को शुरुआत में हत्या का आरोपी बनाया गया था, जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अब पुलिस ने मृतका के बेटे महेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
थाना क्षेत्र के ग्राम कुड्डा निवासी रामबेटी की छह-सात अगस्त 2024 की रात हत्या कर दी गई थी। रामबेटी के सिर पर प्रहार किया गया था। मामले में थाना भमोरा में मुकदमा दर्ज किया गया। शुरुआत में गांव के नत्थू सिंह समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। विवेचना आगे बढ़ी तो पुलिस ने आरोपियों की घटना के समय मौजूदगी, मौखिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों समेत अन्य तथ्यों की जांच की। पुलिस के अनुसार, नामजद लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
पोस्टमार्टम और विशेषज्ञ राय से मिला अहम सुराग
मामले की जांच में रामबेटी की मृत्यु के समय को लेकर विशेषज्ञ राय ली गई। पुलिस के मुताबिक उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आया कि रामबेटी की मृत्यु भोजन करने के करीब दो से चार घंटे के भीतर हुई थी। घटना की रात वह अपने सामान्य सोने के स्थान पर बेटे महेंद्र सिंह के घर पर मौजूद थीं। इसके बाद जांच का दायरा महेंद्र और उसकी पत्नी की घटना से पहले और उस दौरान की गतिविधियों तक पहुंचा। रामबेटी की मौजूदगी और वारदात के बाद पुलिस को दी गई सूचनाओं समेत कई परिस्थितियों को दोबारा जांचा गया।
SSP ने बनाई SIT, 26 महीने बाद बेटा गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने एसआईटी गठित की थी। एसपी दक्षिणी को नोडल अधिकारी बनाया गया और एसपी क्राइम के पर्यवेक्षण में जांच आगे बढ़ाई गई। विवेचना कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर ने की। पुलिस के अनुसार, चिकित्सकीय, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के समग्र परीक्षण में रामबेटी के बेटे 37 वर्षीय महेंद्र सिंह की भूमिका प्रथमदृष्टया सामने आई। इसके बाद 30 सितंबर को पुलिस टीम ने उसे गांव कुड्डा स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय में पेश करने के बाद रिमांड स्वीकृत होने पर उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस का दावा- रंजिश में दूसरों को फंसाने की थी कोशिश
पुलिस जांच में यह भी दावा किया गया है कि वारदात के बाद हत्या का आरोप दूसरे लोगों पर डालने का प्रयास किया गया। शुरुआती मुकदमे में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया था, उनके खिलाफ जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद पुलिस की जांच दूसरी दिशा में बढ़ी और आखिरकार मृतका का बेटा गिरफ्त में आया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महेंद्र के खिलाफ भमोरा थाने में पूर्व में मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज रहे हैं। पुलिस टीम में विवेचक एवं कैंट इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर, भमोरा थाने के उपनिरीक्षक अनोज कुमार और हेड कांस्टेबल सुंदरपाल सिंह शामिल रहे।