बरेली। कलक्ट्रेट गेट पर देवरानी-जेठानी के खुद पर पेट्रोल उड़ेलकर आत्मदाह की कोशिश के मामले में पुलिस-प्रशासन की शुरुआती जांच में कहानी ने नया मोड़ ले लिया है। जिस परिवार ने पड़ोसी पर रास्ता बंद करने का आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया, राजस्व अभिलेखों की पड़ताल में संबंधित गाटों के बीच कोई दर्ज रास्ता नहीं मिला। अब पड़ोसी राजवीर सिंह की तहरीर पर कमलेश समेत सात लोगों के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
कलक्ट्रेट गेट पर पेट्रोल उड़ेला, सुरक्षाकर्मियों ने छीनी बोतल
बुधवार सुबह मानपुर चिकटिया निवासी कमलेश कुमारी अपनी जेठानी मुन्नी देवी, बेटियों और परिवार के अन्य लोगों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचीं। आरोप है कि कमलेश और उनकी जेठानी ने बोतल में लाया पेट्रोल अपने ऊपर उड़ेल लिया। कुछ पेट्रोल बेटियों पर भी गिरा। मौके पर मौजूद इंटेलिजेंस के दरोगा और सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल उन्हें पकड़कर बोतल छीन ली। महिला पुलिसकर्मियों ने तलाशी ली तो उनके पास माचिस या आग लगाने का कोई साधन नहीं मिला। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और तहसीलदार सदर व कैंट पुलिस को परिवार के साथ गांव भेजकर जमीन और रास्ते के विवाद की मौके पर जांच कराई गई।
जांच में मिला- रिकॉर्ड में नहीं है मांगा जा रहा रास्ता
प्रशासनिक पड़ताल में सामने आया कि कमलेश का प्लॉट गाटा संख्या 139 में है, जबकि पड़ोसी राजवीर सिंह का मकान गाटा संख्या 145 में मुख्य सड़क की ओर है। राजस्व नक्शे और उपलब्ध अभिलेखों में दोनों गाटों के बीच उस रास्ते का उल्लेख नहीं मिला, जिसकी मांग कमलेश पक्ष कर रहा है। पुलिस के मुताबिक बुधवार सुबह राजवीर अपने आंगन में निर्माण के लिए नींव की खुदाई करा रहे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया। कमलेश पक्ष कथित तौर पर राजवीर की जमीन से करीब आठ फीट चौड़ा रास्ता देने की मांग पर अड़ गया। यूपी-112 और बाद में चौकी पुलिस ने भी विवाद शांत कराने का प्रयास किया।
जमीन बेचने और कब्जे का विवाद भी जांच के दायरे में
राजस्व जांच में जमीन की पुरानी खरीद-बिक्री का पहलू भी सामने आया है। बताया गया कि गाटा संख्या 139 में कई सहखातेदार हैं। इसी गाटे की 60 वर्गगज जमीन राजवीर ने जून में खरीदी थी। प्रशासन अब पुराने बैनामों, कब्जे की स्थिति और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल कर रहा है। विवाद से जुड़ा मामला सिविल कोर्ट में भी विचाराधीन बताया गया है।
इस वजह से की थी आत्मदाह की कोशिश
प्रारंभिक जांच के मुताबिक विवाद की असली वजह पड़ोसी के आंगन की ओर से रास्ता लेने की मांग और वहां शुरू हुआ निर्माण है। कमलेश पक्ष का आरोप था कि उनकी निकासी प्रभावित की जा रही है और जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे निर्माण कराया जा रहा है। इसी विवाद में प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाने के लिए परिवार कलक्ट्रेट पहुंचा और पेट्रोल उड़ेलकर आत्मदाह की कोशिश की। हालांकि पुलिस-प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
इन सात लोगों पर दर्ज हुई FIR
राजवीर सिंह की तहरीर पर आशुतोष, निर्दोष, कमलेश, रोशनी, मोनू, देशराज और सूर्य प्रताप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। राजवीर का आरोप है कि सातों ने उनकी पुश्तैनी जमीन के बीच से आठ फीट रास्ता मांगा। इनकार करने पर गाली-गलौज और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी। कैंट पुलिस अब आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पहले भी प्रशासन तक पहुंच चुका था विवाद
जांच में यह भी सामने आया कि कमलेश ने करीब तीन महीने पहले एडीएम न्यायिक के यहां मामले की शिकायत की थी। उस स्तर पर हुई पड़ताल में विवाद सिविल कोर्ट में विचाराधीन मिलने के कारण प्रशासनिक आदेश नहीं दिया गया था। अब कलक्ट्रेट की घटना के बाद प्रशासन ने एक बार फिर राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच कराई है।
कलक्ट्रेट की सुरक्षा बढ़ेगी, अग्निशमन उपकरणों के लिए 10 लाख
घटना के बाद जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कलक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कदम उठाए हैं। अग्निशमन उपकरणों के लिए 10 लाख रुपये दिए गए हैं। उपकरण कलक्ट्रेट गेट स्थित एलआईयू कक्ष के साथ विभिन्न कार्यालयों में लगाए जाएंगे। जिलाधिकारी अविनाश सिंह के मुताबिक मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। घटना और जमीन विवाद की मौके पर जांच कराई जा रही है। प्रशासन पर इस तरह दबाव बनाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।