लखनऊ। लखनऊ और कानपुर के बीच तेज और सुगम सफर के लिए तैयार किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ समय बाद ही सवालों के घेरे में आ गया है। कानपुर से लखनऊ आने वाले रूट पर करीब 15 स्थानों पर सड़क खराब मिली है। इनमें सात जगह सड़क उखाड़कर नए सिरे से बनाई जा रही है, जबकि आठ स्थानों पर पैचिंग और अन्य मरम्मत का काम चल रहा है। सड़क की हालत को लेकर किरकिरी के बाद एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी खुद मरम्मत कार्य की निगरानी में जुटे हैं।

किमी-29 से दिखने लगी सड़क की बदहाली

लखनऊ की ओर एक्सप्रेसवे पर बढ़ते ही किमी-29 के आसपास सड़क धंसी और क्षतिग्रस्त नजर आई। कई स्थानों पर डामर और बजरी अलग हो चुकी है। किमी-32.4 और 63.9 के आसपास भी सड़क खराब मिली। कई जगह बैरिकेडिंग कर मरम्मत कराई जा रही है। लखनऊ से कानपुर जाने वाले हिस्से में खराब हुए स्थानों पर पैचिंग का काम कराया जा चुका है।

सात जगह दोबारा बन रही सड़क

कानपुर से लखनऊ आने वाले मार्ग की स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। किमी-64 और 60.2 के आसपास एक तरफ की सड़क उखाड़कर दोबारा बनाई जा रही है। किमी-60.2 पर आधे हिस्से से यातायात निकाला जा रहा है, जबकि दूसरे हिस्से में निर्माण चल रहा है।

इसके अलावा किमी-48.7, 47, 46.7, 39.8, 33 से 34, 30.6, 30 और 28.5 के आसपास भी सड़क के विभिन्न हिस्सों में मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम चल रहा है। किमी-68.6 और 67.2 के आसपास सड़क पर पैचिंग की गई है।

बारिश में शोल्डर भी बहे, अब डाली जा रही नई मिट्टी

बारिश ने एक्सप्रेसवे के शोल्डर को भी नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर किनारों की मिट्टी बहने के बाद शोल्डर को दोबारा मजबूत किया जा रहा है। बाहर से मिट्टी मंगाकर डाली जा रही है और रात में लेवलिंग का काम कराया जा रहा है, ताकि सड़क के किनारे मजबूत किए जा सकें।

सड़क के भीतर पहुंचा पानी बना बड़ी वजह

सड़क खराब होने के पीछे लेवलिंग और ड्रेनेज की समस्या प्रमुख कारण के रूप में सामने आई है। जांच में सड़क के अंदर पानी पहुंचने की बात भी सामने आई है। इसके बाद एनएचएआई उन स्थानों पर सड़क का लेवल और जल निकासी व्यवस्था सुधारने में जुटा है, जहां लगातार नुकसान हो रहा है।

कोशिश की जा रही है कि बारिश का पानी सड़क पर जमा न हो और न ही सड़क की परतों के भीतर पहुंचे।

अंडरपास पर ड्रिल कर निकाला जा रहा पानी

उन्नाव अंडरपास के आसपास कर्मचारी मशीनों से सड़क के नीचे ड्रिलिंग करते दिखाई दिए। आशंका है कि सड़क के भीतर पानी पहुंचने के कारण उसकी परतें कमजोर हुई हैं। ऐसे में ड्रिल कर छोटे होल बनाए जा रहे हैं, जिससे अंदर मौजूद पानी बाहर निकल सके। सड़क और नाली के बीच भी जल निकासी के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है।

एक लेन पर काम, दूसरी से गुजर रहा ट्रैफिक

जिन स्थानों पर सड़क पूरी तरह उखाड़कर दोबारा बनाई जा रही है, वहां एक हिस्से को बंद कर दूसरे हिस्से से वाहनों को निकाला जा रहा है। मरम्मत की निगरानी के लिए एनएचएआई की अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं। वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर काम की गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रख रहे हैं।

उद्घाटन के कुछ समय बाद ही एक्सप्रेसवे पर इतने स्थानों पर सड़क खराब होने और दोबारा निर्माण की नौबत आने से निर्माण की गुणवत्ता और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *